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काढ़े में ये रखें सावधानी

6 वर्ष पहले
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उदयपुर. मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए काढ़ा पीने से गुरुवार सुबह पुलां निवासी शिवशंकर धायभाई सहित परिवार के 7 सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई। धायभाई, उनकी पत्नी यामिनी, बहन-बहनोई और मां सिर दर्द, गला सूखने और चक्कर आने की शिकायत हुई, जबकि स्कूल में 4 साल के बेटे अक्षत और बेटी सुभीता (7) की हालत ज्यादा खराब हो गई।
टीचर्स की सूचना पर दोनों को तुरंत बाल चिकित्सालय के वार्ड नंबर-11 में भर्ती कराया गया। परिजनों ने बताया कि बच्ची दोपहर तक घरवालों को भी पहचान नहीं पा रही थी। बताया कि काढ़ा देहलीगेट क्षेत्र में एक दुकान से खरीदा था। फतहपुरा चौकी इंचार्ज शंभूनाथ ने बताया कि सभी परिजनों के बयान लिए हैं। काढ़े के पैकेट पर लेवल या कंटेंट की मात्रा अंकित नहीं थी।

किस उम्र में कितनी मात्रा

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. शोभालाल औदिच्य के मुताबिक एक साल से कम उम्र के बच्चे को काढ़ा नहीं पिलाना चाहिए। एक से 10 साल के बच्चे को एक या दो चम्मच, 20 साल तक तीन चम्मच और इससे ऊपर के उम्र के लोगों को 20 से 50 एमएल पीना चाहिए। साठ वर्ष तक के लोगों को 20 से 30 एमएल लेना चाहिए। सप्ताह में सिर्फ तीन बार से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।

डॉ. लाखन पोसवाल ने बताया कि बच्ची के ब्रेन पर काढ़े का असर हुआ है। इसे मेडिकल भाषा में हेलूसिनेशन कहा जाता है। परिजनों ने काढ़े का जो पैकेट दिया है, उसकी जांच करवाएंगे। सैंपल जयपुर फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं। इसमें पता लगेगा कि कंटेंट खराब था या ज्यादा मात्रा से यह सब हुआ।

> चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ की देखरेख में काढ़ा पीएं और पिलाएं। इसके लिए संस्थाएं आयुर्वेद औषधालय संपर्क कर सकती हैं।
> काढ़ा प्लास्टिक की बोतल या ग्लास में नहीं पीएं। इसे वापस गरम ना करें और ना ही फ्रीज में रखें।
> भूखे पेट या खाने के डेढ़ से दो घंटे बाद पीएं। पीने के एक घंटे बाद कुछ नहीं लें। दही, छाछ, ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक से परहेज करें।