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‘बड़ी कंपनियां पहुंचा रही प्रकृति को नुकसान’

6 वर्ष पहले
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आजके युवा में गांवों की बजाय शहरों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। दोनों जगहों के बीच अवसरों तथा काम के स्तरों को लेकर असमानता की भावना है। इसे समाप्त करने के लिए एक वातावरण निर्माण की आवश्यकता है। ये बात महात्मा गांधी की पोती इला गांधी ने सेवा मन्दिर एवं उम्मेद मल लोढ़ा ट्रस्ट के तत्वावधान में गुरुवार को आयोजित 16वें पर्यावरण पुरस्कार समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने कहा कि चाहे शौचालय की सफाई हो या फिर घर, दफ्तर की। किसी भी काम में ऊंच-नीच का भाव नहीं होना चाहिए। समाज विकास में प्रत्येक व्यक्ति की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। गांधी ने कहा कि लालच के कारण आज बड़ी-बड़ी कम्पनियां अलग-अलग तरीके से प्रकृति को नुकसान पहुंचा रही है। इसे रोकने की जरूरत है। सेवा मन्दिर जैसी संस्थाएं ग्राम स्वराज का वास्तविक मॉडल बन सकती हैं। कार्यक्रम में उदयपुर एवं राजसमंद जिले में कार्यरत ग्राम स्तरीय संस्थाएं, व्यक्तिगत नेतृत्व पुरस्कार एवं सायर कवर लोढ़ा छात्रवृत्ति प्रदान की गई। अध्यक्षता अजय सिंह मेहता ने की। तथा विशिष्ट अतिथि उम्मेद मल लोढ़ा ट्रस्ट के अध्यक्ष हेमराज भाटी थे।

झाड़ोल के भामटी, बडग़ांव के तन्तेला एवं रामा, नागरिक विकास मंच देलवाड़ा को 15 हजार रुपए नकद एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। वन सुरक्षा समिति सूरजगढ़, रेंज गोगुन्दा को भी 15 हजार रुपए, व्यक्तिगत श्रेणी में पीपड़ निवासी मानसिंह, झाड़ोल निवासी तेजी बाई, झाड़ोल के परदा निवासी सूरजमल को 3 हजार रुपए और कालीवास गिर्वा निवासी इंदिरा को 12 हजार रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।

विद्याभवन सभागर में उम्मेदमल लोढा पर्यावरण पुरस्कार स्मृति व्याख्यान में पुरस्कार प्रदान करती मुख्य अतिथि इला गांधी। भास्कर