उदयपुर. झील विकास प्राधिकरण के मुख्यालय पर पहला हक लेकसिटी का है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, जल संसाधन मंत्री किरण माहेश्वरी, सांसद अर्जुन मीणा सहित मेवाड़ के जनप्रतिनिधि, झील प्रेमी और यहां की जनता की ये पुरजोर मांग है कि देश-दुनिया में झीलों के शहर के नाम से मशहूर उदयपुर के अलावा झील विकास प्राधिकरण के मुख्यालय के लिए दूसरी जगह नहीं हो सकती है।
गौरतलब है कि दैनिक भास्कर मेवाड़ के हक की आवाज लगातार उठाता रहा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को आईआईएम के शिलान्यास समारोह में रही हैं। जनप्रतिनिधि उनके समक्ष यह मांग और जनभावना भी रखेंगे।
अगस्त 2014 में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान सीएम वसंुधरा यहां आई थीं। 16 अगस्त को पीछोला में बोटिंग की थी। राजे ने मेवाड़ की धरा को स्वर्ग बताया था।
जहां झीलें हैं वहीं पर झील विकास प्राधिकरण का मुख्यालय हो। यही मेवाड़ की जनता चाहती है।
-गुलाबचंद कटारिया, गृहमंत्री
मुख्यालय झीलों की नगरी में ही खुलना चाहिए। -किरणमाहेश्वरी, जलदाय मंत्री
प्रमुख शासन सचिव डॉ.सुबोध अग्रवाल नेकहा था कि मुझे भी झीलों से प्यार है, सरकार तक शहरवासियों की भावना पहुंचाऊंगा।
राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना को लेकर पिछले दिनों जयपुर में बैठक हुई। यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता निगम आयुक्त हिम्मतसिंह बारहठ ने स्वायत्त शासन सचिव मंजीत सिंह के समक्ष जनता की बात रखी।
30 जनवरी को प्रकाशित
सांसद अर्जुन मीणा नगर परिषद के पूर्व सभापति रवींद्र श्रीमाली ने सीएम को पत्र लिखा है कि जनभावना के अनुरूप मुख्यालय उदयपुर में ही खोला जाए। झीलों के कारण पर्यटन व्यवसाय भी बढ़ रहा है और दुनिया मेें राजस्थान का नाम है। झीलों से मेवाड़ का भावनात्मक संबंध है। सर्वाधिक झीलें उदयपुर संभाग में हैं ऐसे में इसे रोल मॉडल बनाकर प्रदेश की अन्य झीलों के विकास की योजना बनाई जा सकेगी।