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पुलिस ने अपना काम किया था, सीबीआई ने बिना साक्ष्य के मुझे फंसाया : कटारिया

7 वर्ष पहले
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गृहमंत्रीगुलाबचंदकटारिया का कहना है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में पुलिस ने अपना काम किया। सीबीआई ने उस वक्त राजनीतिक दबाव में बिना साक्ष्य के मुझे फंसाने की काल्पनिक भूमिका बांधी। फंसाने की ये चाल किसने चली उस व्यक्ति को मैं आज तक ढूंढ नहीं पाया हूं, और बिना तथ्यों के किसी पर आरोप लगाना मेरी फितरत में नहीं है। कटारिया ने इस केस से लेकर सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से दोषमुक्त होने तक के हर एक सवाल का जवाब भास्कर को दिया। मार्बल व्यवसायियों में सोहराबुद्दीन के खौफ को लेकर उन्होंने कहा कि हमीद लाला का मर्डर हुआ तब उदयपुर में कोई गैंग होने की बात सामने आई थी। केस के सिलसिले में गुलाबचंद कटारिया शुक्रवार को मुंबई में थे। वे रात को उदयपुर पहुंचे।

जब उस वक्त सीबीआई दबाव में थी तो अब केंद्र में एनडीए सरकार है, क्या इसका भी इस केस पर असर रहाω

{(इससवाल का उन्होंने सीधा जवाब तो नहीं दिया बस इतना बोले) सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश होने के बाद हमने हमारे पक्ष में जो भी साक्ष्य दिए सीबीआई उन पर काउंटर नहीं कर पाई, इससे ही पता लगता है कि हम शुरू से ही सच्चे निर्दोष थे।

Q. तबआप गृहमंत्री थे, ऐसे में तब सोहराबुद्दीन के बारे में आपके पास क्या कोई इनपुट आए थेω ?

{हमीदलाला का मर्डर हुआ तब कोई गैंग होने की बात आई सामने थी। मैं इस मामले में बस इतना ही कहूंगा कि पुलिस ने अपना काम किया। सीबीआई ने मुझे फंसाया।

दोषमुक्त होने के बाद गृहमंत्री कटारिया ने केस से जुड़े हर सवाल का दिया जवाब

Q. निगम आैर पंचायती राज चुनाव में आपके नेतृत्व में पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अब इस केस में भी आप निर्दोष साबित हुए हैं। तीनों सफलताओं को आप कैसे देखते हैंω ?

{निगमचुनाव पंचायत चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक सफलता मिली है। सबकी मेहनत थी। जनता ने विश्वास जताया रही बात इस केस की तो इसमें जो सफलता मिली है वह सच्चाई की जीत है।

Q.सोहराबुद्दीनकेस ने आपके निजी और राजनीतिक जीवन पर क्या असर डालाω ?

{देखिए,एक सच्चे आदमी पर ऐसे बेबुनियाद आरोप लगाए जाते हैं तो वह परेशान तो होगा ही। लेकिन, मुझे सच पर भरोसा था। मेरा आत्मविश्वास कभी कमजोर नहीं हुआ। मेरा सामाजिक राजनीतिक जीवन बेदाग है, ये जनता और मेरी पार्टी दोनों जानते हैं।

Q.सोहराबुद्दीन केस में सीबीआई की भूमिका को अाप किस नजरिए से देखते हैंω ?

{सीबीआईने बिना किसी साक्ष्य के बेगुनाह को गुनहगार बनाने की भूमिका बनाई, मगर सीबीआई का सच सामने गया। एनकाउंटर 2005 में हुआ और मेरे खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट 2013 में पेश की गई, इस पर सवाल उठता है।

Q.तब यूपीए सरकार केंद्र में थी। क्या आपको लगता है कि सीबीआई पर राजनीतिक दबाव थाω ?

{सीबीआईपर राजनीतिक दबाव था, तभी बेगुनाह को लपेटे में लेकर फंसाने की चाल चली गई।

Q.आप कह रहे हैं कि इस केस में आपको फंसाने की चाल चली गई, यह चाल क्या आपके राजनीतिक विरोधियों की थीω ?

{चाल किस की थी, मैं उसे ढूंढ नहीं पाया हूं। मैं किसी पर झूठा आरोप नहीं लगाता हूं। अाप जानते हो कि यह मेरी आदत में ही नहीं है।

Q.सोहराबुद्दीन के खौफ को लेकर मार्बल व्यवसायियों ने कभी आपको शिकायत कीω ?

{(इससवाल पर कटारिया ने कहा ऐसे सवालों का मेरे पास कोई जवाब नहीं है, आप ऐसे सवाल पूछ ही क्यों रहे हैं।)

Q.क्या अाप मानते हैं कि इस केस से पुलिस का मनोबल गिरा है। दिनेश एमएन जैसे पुलिस अफसरों को आरोपी बनाया गया थाω ?

{मैंपहले ही कह चुका हूं जिस प्रकार बेगुनाह को फंंसाने का प्रयास किया गया है। उससे निश्चित तौर पर पुलिस का मनोबल तो गिरा ही है।

Q.राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं चलती रही हैं, मान लीजिए, यदि ऐसा होता है तो उस स्थिति में आप खुद को नंबर वन की दौड़ में मानते हैंω ?

{मैंकभी तो नंबर वन की दौड़ मेंं रहा हूं और ही नंबर टू की। मैं तो सिर्फ काम की सोचता हूं और उसी के लिए दौड़ता हूं। पद से ज्यादा मेरा ध्यान काम पर रहता है। संगठन मुझे जो भी जिम्मेदारी देता है मैं बस उसे पूरी निष्ठा से निभाता हूं। मेरे लिए पद का नहीं जिम्मेदारी का महत्व है।