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कटारिया के खिलाफ शास्त्री के घर गुप्त बैठक, शाह को भेजी शिकायत
जिसे जो करना है, करे, मुझे काम से मतलब
इस सियासत के मायने गहरे
कटारिया के लिए यह लिखा पत्र में
भाजपामेंगृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का विरोधी खेमा फिर से सक्रिय हो गया है। पूर्व सांसद भानुकुमार शास्त्री के घर बुधवार को गोपनीय बैठक कर कटारिया के खिलाफ चार पेज का शिकायती पत्र तैयार किया गया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भेजा गया। इसमें भींडर में भाजपा की मदद से कांग्रेस का बोर्ड बनवाने की खिलाफत की गई है। पार्टी से बागी होकर विधायक बने रणधीर सिंह भींडर को भाजपा में लेने की भी मांग की गई है। सर्वऋतु विलास स्थित शास्त्री के निवास पर हुई बैठक में पूर्व शहर विधायक शिवकिशोर सनाढ्य पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत जैसे नेता भी मौजूद रहे। बैठक में मेवाड़ में चल रहे राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। भींडर में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि इससे पार्टी की छवि खराब हुई है। राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश नेतृत्व तक यह बात पहुंचानी होगी। इसके बाद आमराय बनाकर आलाकमान को हस्ताक्षरशुदा पत्र भेजा गया। पूर्व सांसद महावीर भगोरा से भी घर जाकर इस पर हस्ताक्षर कराए गए। बैठक में पूर्व शहर विधायक शिवकिशोर सनाढ्य ने रणधीरसिंह भींंडर को पार्टी में लेने का प्रस्ताव रखा। कहा गया कि भींडर में उनके होने से भाजपा कमजोर हुई है।
बैठक में ये भी थे मौजूद
पूर्वशहरजिलाध्यक्ष ताराचंद जैन, मांगीलाल जोशी, पूर्व संभाग संगठन मंत्री धर्मनारायण जोशी, पूर्व उपसभापति वीरेंद्र बापना, पूर्व उपमहापौर महेंद्रसिंह शेखावत, पूर्व जिला महामंत्री दूल्हेसिंह सारंगदेवाेत, पूर्व मंडल अध्यक्ष अनिल सिंघल, विजय प्रकाश, पूर्व पार्षद एवं जिला मंत्री दिग्विजय श्रीमाली
^ मैं फालतू काम में समय और शक्ति नहीं लगाता। जिसे जो करना है, करे। आलोचनाओं पर जवाब देने से नहीं, मुझे सिर्फ काम से मतलब है। मैं इसी पर ध्यान देता हूं। गुलाबचंदकटारिया, गृहमंत्री
भाजपा मेंगुटबाजी बरसों पुरानी है। कुछ महीने से दबी हुई थी। भींडर प्रकरण के बहाने चिंगारी फिर से सुलगा दी गई है। विधानसभा चुनाव के समय कटारिया की खुलेआम खिलाफत करने वाला धड़ा इस उम्मीद से चुप था कि इसके बाद उनके हाथ भी सत्ता का थोड़ा बहुत सुख लगेगा, लेकिन मौजूदा समीकरणों में कटारिया के चाहे बिना यह संभव नहीं। अब तक हुए सभी निर्णय कटारिया ने ही लिए। नगर निगम और निकाय चुनाव में भी इस धड़े की पूछ परख ज्यादा नहीं हुई तो वह मौके की ताक में था। भींडर में भाजपा की मदद से कांग्रेस का बोर्ड बन गया तो कटारिया और उनकी लॉबी को घेरने का मौका मिल गया। लोकसभा, विधानसभा, नगर निगम और अब निकाय चुनाव में ज्यादातर टिकट और बड़े पद कटारिया के नजदीकियों को ही मिले। अब यूआईटी अध्यक्ष का एकमात्र बड़ा पद बचा है, जिसपर सबकी नजर है।
संभाग में संगठन स्तर पर जिस प्रकार की कार्रवाइयां की जा रही हैं, उससे कार्यकर्ताओं का मन व्यथित है।
कटारिया की व्यक्तिगत वैमनस्यता के कारण भींडर में भाजपा के दो सदस्यों ने रणधीर सिंह भींडर की जनता सेना के सदस्य को प्रधान बनने से रोकने कांग्रेस को वाेट दिया। उप प्रधान के चुनाव में कांग्रेस को भाजपा के चुनाव चिह्न पर आपत्ति थी तो भाजपा नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी बनना स्वीकार कर लिया।
{जिला परिषद सदस्य के चुनाव में लेन देन के खुलकर आरोप लगना पार्टी सिद्धांत शुचिता के विपरीत है।
{इन सभी घटनाओं की पृष्ठभूमि में एक ही नाम उभरकर रहा है वो नाम है गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का।
{शहर देहात जिला अपनी सुविधा के हिसाब से गठित कर रखे हैं। कई पुराने वरिष्ठ नेता उपेक्षित हैं।
{संगठन चुनावी प्रक्रिया में वे सभी नेता दरकिनार हैं, जिनसे कटारिया को परहेज है।
भाजपा नेताओं ने पत्र में लिखा है कि स्थितियां अति गंभीर हैं। कभी भी विस्फोटक रूप धारण कर सकती है।
पूर्व सांसद भानु कुमार शास्त्री के निवास पर बैठक करते भाजपा नेता। फोटो: भास्कर