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हेडमास्टरों ने 10 साल से नहीं दी 17 करोड़ की यूसी
जिलेके हजारों सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों के लिए दिए 17 करोड़ रुपए के उपयोग को लेकर संस्था प्रधान शक के घेरे में हैं। इन्होंने इन कामों के उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) 10 साल बाद भी सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) को नहीं दिए हैं। नतीजतन शिक्षा विभाग काे यह तक पता नहीं है कि किन स्कूलों में काम हुआ और कहां नहीं, निर्माण कार्यों में राशि पूरी उपयोग में ली है या बचा ली गई। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में जिन संस्था प्रधानों ने यूसी दी थी, उन पर करीब 12 लाख रुपए की रिकवरी निकली थी। इसमें पता लगा था कि जितना बजट दिया गया, उतने से कम में काम कराकर पूरे बजट में होना बता दिया था। ऐसे में स्वीकृत हुए 17 करोड़ रुपए के 1910 कामों की यूसी नहीं मिलने पर सवाल खड़ा हो रहा है।
ब्लॉक काम बकाया यूसी
बड़गांव2750000
झाड़ोल22819137995
सराड़ा12710830694
गोगुंदा16517481329
मावली21212259474
सलूम्बर33112055112
लसाडिय़ा17015570510
भीण्डर747836352
गिर्वा11023495636
खेरवाड़ा27030472257
कोटड़ा22121172414
कुल191017,1061773
(बाकीयात लाखाें में)
10 साल से डीईओ, एसएसए जिला समन्वयक से लेकर बीईओ यूसी वसूल करने के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग में विफल रहे। कलेक्टर के आदेश बाद अब विभाग इनके खिलाफ सख्ती की तैयारी में है।
20 तक यूसी नहीं दी तो कार्रवाई करेंगे
^यूसीजमा नहीं कराने वाले संस्था प्रधानों को 20 फरवरी तक जमा कराने के निर्देश दिए हैं। जमा नहीं कराने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। यूसी जमा होने के बाद ही इंजीनियर से मेजरमेंट कराया जाएगा। तभी पता लगेगा कि काम कितना हुआ, कितना नहीं। भूपेन्द्रजैन, डीईओ, प्रारंभिक शिक्षा
एचएम बदलते रहे, पुरानों पर डालते रहे जिम्मेदारी
एसएसएद्वारा जब भी मौजूदा संस्था प्रधानों से स्वीकृत काम की यूसी मांगी गई, उन्होंने उस स्कूल से ट्रांसफर या सेवानिवृत्त हो चुके एचएम पर जिम्मेदारी डाल दी। जिन्होंने निर्माण कराया लिया, उनमें से कई रिकॉर्ड नहीं होने तो कई बीईईओ कार्यालय में फाइल भेजने का बहाना बना रहे हैं। पहले भी कलेक्टर के आदेश पर कई बार संस्था प्रधानों को नोटिस जारी हुए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।