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जीवन को खुशहाल बनाने को प्रत्यक्ष निमित्त की जरूरत नहीं होती : सुधा सागर

उदयपुर| मुनिसुधासागर ने कहा कि लोग दो प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त करते हैं। एक प्रत्यक्ष और दूसरी अप्रत्यक्ष।...

Dainik Bhaskar

Jun 17, 2016, 06:40 AM IST
जीवन को खुशहाल बनाने को प्रत्यक्ष निमित्त की जरूरत नहीं होती : सुधा सागर
उदयपुर| मुनिसुधासागर ने कहा कि लोग दो प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त करते हैं। एक प्रत्यक्ष और दूसरी अप्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष को देख महसूस कर सकते हैं। जबकि अप्रत्यक्ष को देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं। मुनिश्री गुरूवार को देवाली स्थित प्रवचन सभागार में श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित कर रहे थे। मुनिश्री ने कहा कि ठीक इसी प्रकार प्रकाश भी दो प्रकार का होता है। एक सूर्य और र|ों का प्रकाश और दूसरा दीपक का। सूर्य र|ों के प्रकाश को प्रज्वलित होने के लिए किसी माचिस की जरूरत नहीं होती, जबकि दीपक बिना जलाए प्रकाशित नहीं सकता यानि जीवन को खुशहाल बनाने के लिए किसी प्रत्यक्ष निमित्त की जरूरत नहीं होती है।

प्रचार मंत्री शांति कुमार कासलीवाल ने बताया कि मुनिश्री का सुबह 6.30 बजे अशोक नगर से ससंघ विहार शोभायात्रा के रूप में आरके हाउस के लिए हुआ। इस दौरान मुनिश्री का जगह जगह पाद पक्षालन हुआ। सह-प्रचार मंत्री राकेश जैन ने बताया कि मुनिश्री शुक्रवार सुबह 6 बजे फतहसागर पाल स्थित टाया मोती महल से मंडी की नाल के लिए विहार करेंगे, जहां 19 जून तक पंचकल्याणक महोत्सव में प्रतिष्ठित प्रतिमाओं को विधान के साथ मंदिर की वेदी पर विराजित कराएंगे। इस दौरान मेयर चन्द्र सिंह कोठारी, पारस सिंघवी, पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र गोयल आदि उपस्थित थे।

कल्याणतो प्रभु भक्ति से ही होना है: आचार्य विमद सागर : आचार्यविमद सागर ने कहा कि दिव्य वचन नौका के समान होते हैं। जिस प्रकार लकड़ी की नौका में बैठने वाला एक किनारे से दूसरे किनारे पर चला जाता है, लेकिन पत्थर की नाव डूब जाती है और उसमें बैठने वाला भी डूब जाते है। जीवन का कल्याण प्रभु भक्ति से ही होगा। आचार्यश्री आदिनाथ भवन, सेक्टर 11 में गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भोजन में तो कोई भजन में मगन है। कोई लोभ माया के लिए परेशान हैं तो कोई त्याग करके खुश है। किसी को घर परिवार अच्छा लगता है तो किसी को गुरुओं की सेवा करने में आनंद प्राप्त होता है। किसी को देने में भला लगता है तो किसी को लेने में भला लगता है। लेकिन सच्चा आनंद आत्मा में है।

देवाली स्थित प्रवचन सभागार में मुनि सुधासागर महाराज के प्रवचन सुनते लोग।

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