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संस्कृत विलुप्तम्! 1 लाख घटे संस्कृत के विद्यार्थी, 40 फीसदी शिक्षकों के पद खाली

Udaipur News - सरकारभले ही गीता और सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ावा देने का हर दिन दावा कर रही हो लेकिन राज्य शिक्षा विभाग में संस्कृत...

Dainik Bhaskar

Jul 02, 2016, 06:40 AM IST
संस्कृत विलुप्तम्! 1 लाख घटे संस्कृत के विद्यार्थी, 40 फीसदी शिक्षकों के पद खाली
सरकारभले ही गीता और सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ावा देने का हर दिन दावा कर रही हो लेकिन राज्य शिक्षा विभाग में संस्कृत की हालत बद से बदतर है। अनदेखी का ही नतीजा है कि बीते 8 साल में संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों की संख्या घटकर अब आधी रह गई है। कभी संस्कृत पढ़ने के लिए राज्य भर में 2 लाख बच्चों तक के आने वाले नामांकन की संख्या अब 1 लाख तक में सिमट गई है वहीं सामान्य शिक्षा में सिर्फ उदयपुर जिले में ही 3 लाख 79 हजार बच्चों के नामांकन हैं। प्रदेश के संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों के 40 प्रतिशत पद भी खाली हैं। इस साल कई वरिष्ठ उपाध्याय और प्रवेशिका स्कूलों में अभी तक नए प्रवेश ही नहीं हुए। जो पहले से हैं वे भी टीसी कटवा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में 35 स्कूलों में ताले लग चुके हैं। इन हालातोंं की वजह से संभाग के 5 जिलों में प्रवेशिका का परिणाम भी 50% से कम रहा है। वर्ष 2008 के बाद से संस्कृत शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई और ना ही विद्यार्थियों के नामांकन बढ़ाने के कोई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। संस्कृत शिक्षा के सेवानियमों में सामान्य विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता बंद किए जाने से भी शिक्षकों में निराशा है।

दाखिला नहीं ले रहे बच्चे, जो हैं वो भी कटवा रहे टीसी

राजकीयप्रवेशिका संस्कृत स्कूल सांकरिया (गोगुंदा) में इस साल 10वीं में एक भी प्रवेश नहीं हुआ। यहां 90 बच्चों पर एक शिक्षक है। जयसमंद प्रवेशिका स्कूल में तो हाल ही में 60 बच्चोंं ने एक साथ टीसी कटा ली। चित्तौड़गढ़ के भूपालखेड़ा प्रवेशिका स्कूल में अपने बच्चों को अभिभावक स्कूल ही नहीं भेज रहे। अधिकतर स्कूलों से यही स्थिति है कि वहां टीसी कटवाने के लिए प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2007-08 में संस्कृत शिक्षा विभाग के कुल 1766 स्कूलों में 227302 बच्चों का दाखिला था, जो वर्ष 2015-16 में घटकर 106471 रह गया है। उदयपुर संभाग मेंं वर्ष 2009-10 में 35 हजार नामांकन था और घटकर 17 हजार रह गया है।

शिक्षक हैं नहीं, 32 स्कूलों पर ताले, 309 स्कूलों पर सिर्फ एक शिक्षक

शिक्षकोंकी कमी की वजह से प्रदेश में करीब 32 स्कूलों पर ताले लग चुके हैं और 309 स्कूल सिर्फ एक ही शिक्षक के जिम्मे हैं। राज्य में 142 में से सिर्फ 1 ही प्रिंसिपल कार्यरत है। संस्कृत पढ़ाने वाले 29 शिक्षक ऐसे हैं जिन्हे सामान्य (गणित, विज्ञान, अंग्रेजी आदि) विषय के विरुद्ध पदों पर लगाया हुआ है।

अभिभावककर रहे शिकायत

^स्कूलोंमें शिक्षक कम होने से नामांकन बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। कई स्कूल बंद करने पड़ गए। अभिभावकों की बार-बार शिकायतें रही हैं। भगतीशंकरव्यास, संभागीय शिक्षा अधिकारी, संस्कृत शिक्षा विभाग

बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है

^हालही रीट परीक्षा हुई है उसमें से संस्कृत शिक्षा विभाग में शिक्षक लिए जाएंगे, इसके लिए हमने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। रीट का अंतिम परिणाम आने वाला है और इससे हमे शिक्षक मिलते हैं तो स्कूलों को फायदा होगा। कालीचरणसर्राफ, संस्कृत शिक्षा मंत्री

पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त

प्रिंसिपल1421 141

एचएम229168 152

लेक्चरर837426 411

व.अध्या. 30061513 1488

तृतीयश्रेणी 65844291 2293

कुल107986399 4385

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