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{ आईआईएम लखनऊ 200 {आईआईएम रोहतक 200 {आईआईएम काशीपुर 200 {आईआईएम अहमदाबाद 106 {आईआईएम इंदौर 193 एकड़ {आईआईएम कोलकाता 135 {आईआईएम कोजी कोड़े 97 एकड़ में

4 वर्ष पहले
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{2011 में बना आईआईएमयू

{पीजीपीऔरपीजीपीएक्स मिलाकर 340 सीटें हैं

{ इस साल से 60 सीटें और बढ़ने से कुल 400 सीटें हो जाएंगी

{देश के संस्थानों की रैंकिंग में इस वर्ष 15वें स्थान पर रहा

उदयपुर में 300 एकड़ में बन रहा देश का सबसे बड़ा ईको फ्रेंडली और फ्यूल-फ्री स्मार्ट आईआईएम कैम्पस

आधा काम हुआ, 2020 तक होगा पूरा

उदयपुर. बलीचा स्थित अरावली पहाड़ियों पर 300 एकड़ में तैयार हो रहा देश का सबसे बड़ा आईआईएम कैम्पस

उदयपुर शहर से 15 किलोमीटर दूर बलीचा स्थित अरावली की पहाड़ियों के बीच बन रहा खूबसूरत कैंपस, निर्माण के बाद संस्थान प्रबंधन सरकार से नहीं लेगा बजट, पूरा खर्चा खुद मैनेज कर पूरा करेगा

निखिल शर्मा| उदयपुर

शहरसे 15 किलोमीटर दूर बलीचा स्थित अरावली की पहाड़ियों के बीच 300 एकड़ में बन रहा आईआईएम उदयपुर का विशाल कैम्पस देश के सभी आईआईएम संस्थानों से बड़ा और सेल्फ सस्टेंड (मूलभूत सुविधाएं को लिए खुद पर निर्भर) कैम्पस होगा। खास बात यह है कि कैम्पस में कई स्टोरेज बनेंगे जिससे बिजली, पानी, ईंधन के लिए इसे किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कैंपस पूरी तरह ईको-फ्रेंडली और फ्यूल फ्री होगा। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट में कई स्मार्ट सुविधाएं भी हैंं जो कैंपस को स्मार्ट बनाएंगी।

कैम्पसमें पांच झीलें होंगी, बारिश का एक बूंद पानी भी नहीं जाएगा बेकार : नएकैम्पस में 5 बड़ी झीलें होंगी जिसमें 213 मिलियन लीटर पानी रहेगा। आईआईएम का सालाना पानी का उपभोग 157 मिलियन लीटर है। बरसात के दौरान इन झीलों में पानी एकत्रित होगा। कैम्पस को कैचमेंट से इस तरह जोड़ा गया है कि बारिश का एक बूंद पानी भी बेकार नहीं जाएगा। छत से मिलने वाले 50 मिलियन लीटर पानी को पीने और शेष 107 मिलियन लीटर को अन्य कामों में उपयोग किया जाएगा। शेष 56 मिलियन लीटर पानी का उपयोग सिंचाई में किया जाएगा।

रूफटॉपपर सोलर प्लांट, बिजली के लिए किसी पर निर्भर नहीं : आईआईएममें 2 मेगावाट सोलर बिजली उत्पादन करने वाले रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए गए हैं। ये वर्ष भर में लगभग 4200 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगे। आईआईएम कैम्पस को पूरी तरह से बिजली से केन्द्रीयकृत किया जाएगा। साथ ही एलईडी फिक्सचर लगाए जाएंगे। वहीं एसी के लिए वॉल इंसुलेशन लगाए जाएंगे जो एक बार में ही कई कमरों को ठंडा कर देगा। वर्षभर में जितनी बिजली की आवश्यकता आईआईएम को होगी, वह सोलर प्लांट से ही पूरी हो जाएगी। बाहर से बिजली लेने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

आईआईएम से मिली नई पहचान- उदयपुर जिले में सामाजिक बदलाव लाने में भी निभा रहा अहम रोल

आईआईएमउदयपुर की अलग पहचान होने के साथ यहां सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। यहां के छात्र आदिवासी गांवों में जाकर समय-समय पर सर्वे करने के साथ सामाजिक पिछड़ेपन की रिपोर्ट भी बनाते हैं। दो माह पहले छात्रों ने आदिवासी क्षेत्रों में कुछ सप्ताह एक रिपोर्ट पेश की थी। जिसमें बताया था कि स्मार्ट सिटी उदयपुर के दो चेहरे हैं। एक ओर जहां शहर दिनों दिन स्मार्ट होता जा रहा है वहीं यहां से कुछ दूर स्थित गांवों की स्थिति विकराल होती जा रही है। अशिक्षा, बाल विवाह, खुले में शौच की बड़ी सममस्या है। रिपोर्ट को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी जिसके बाद जिला प्रशासन ने उस पर अमल करते हुए इस पर काम करने को कदम बढ़ाए थे।

प्रोजेक्ट मैनेजर बोले- देशका सबसे बड़ा होगा कैंपस, 2020 तक तैयार होगा, 5 स्टार गृह रेटिंग मिलेगी

^आईआईएमके प्रोजेक्ट मैनेजर और आर्किटेक्ट अक्षय सिंघवी ने बताया कि आईआईएम का यह देश में सबसे बड़ा और अनोखा कैम्पस 2020 तक तैयार हो जाएगा। लगभग आधा काम पूरा हो चुका है। काम पूरा हो जाने के बाद एमएचआरडी से यह कोई पैसा नहीं लेगा, सारा खर्चा खुद वहन करेगा। इसका पूरा इंटीरियर राजस्थानी अंदाज में डिजाइन किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर होने के कारण इसे गृह 5-स्टार एलडी रेटिंग मिलने की पूरी उम्मीद है। अक्षय ने बताया कि आईआईएम में पानी के प्रबंधन की तकनीक से हम आस-पास के सभी को जागरूक करेंगे और इसका इस्तेमाल कर पानी बचाना सिखाएंगे। -प्रोजेक्टमैनेजर अक्षय सिंघवी

कैम्पस में ईधन के रूप में बायोगैस का इस्तेमाल होगा। जीरो वेस्ट कचरा प्रबंधन तकनीक से पेपर, पत्तियां, प्लास्टिक, मेटल सहित कचरों को रिसाइकिल किया जाएगा। पूरे कैम्पस में तीन तरह की ट्रायसाइकिल चलेंगी। इसमें हरे ट्रायसाइकिल पेपर और पत्तियों को, नीली ट्रायसाइकिल मेटल और प्लास्टिक को और सफेद ट्रायसाइकिल रिसाइकिल होने वाले कचरे को इकट्ठा करेंगी। इससे बायोगैस बनाकर हॉस्टल और मैस में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

स्मार्ट कैम्पस पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होगा। कैम्पस को ग्रीन बनाने और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत यानी 120 एकड़ में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए आईआईएम फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर मिट्टी का टेस्ट किया गया है। इसमें हर 10 मीटर पर जमीन जिस पौधे के लिए अनुकूल होगी, वहां वही पौधे लगाए जाएंगे। कैम्पस में पेट्रोल-डीजल, गैस से चलने वाली गाड़ियों को अनुमति नहीं दी जाएगी। सिर्फ बैटरी से चलने वाले वाहन ही चलेंगे।

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