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झील किनारे बनी वाटिकाओं की हकीकत देखने पहुंची निगम की टीम, लिया जायजा

5 वर्ष पहले
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फतहसागरकिनारे संचालित वाटिकाओं में समारोह के बाद बची झूठन झील के कैचमेंट में ही खाली करने का मामला सामने आने के बाद सोमवार को राजस्व शाखा की टीम हकीकत जानने मौके पर पहुंची।

आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग के निर्देश पर राजस्व अधिकारी अनिता मित्तल अपनी टीम के साथ बड़ी रोड पहुंचीं। जहां वाटिकाओं की झूठन और वेस्टेज सामग्री खाली की जाती है। निगम टीम को यहां खाली जमीन पर वेस्टेज सामग्री, कचरा भी दिख गई। आयुक्त ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए झील किनारे सभी वाटिकाओं को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लेने के निर्देश भी राजस्व शाख को दिए है। वाटिकाओं से लिखित में यह भी पूछा जाएगा कि झूठन और वेस्टेज सामग्री वे कहां डालते है। भास्कर ने सोमवार को प्रशासन और निगम का ध्यान इस तरफ दिलाया था। इधर, शहर के जागरूक लोगों ने जिले के प्रभारी सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल को भी इस मामले में शिकायत भेज आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

ऐसेहो सकता है स्थाई समाधान : झीलकिनारे निगम से पंजीकृत वाटिकाओं के बारह कंटेनर रखने से इस समस्या का स्थाई समाधान हो सकता है। कार्यक्रम के बाद झूठन और वेस्टेज कंटेनर में डाला जाए और उसको बाद में उठाने की व्यवस्था निगम करें। वाटिका पंजीयन के तहत सालाना शुल्क भी तय किया जा सकता है। समिति अध्यक्ष नानालाल वया ने इस सुझाव को स्थाई समाधान के लिए उपयुक्त बताया।





ते हुए कहा है कि जल्द ही गैराज समिति के साथ चर्चा कर यह व्यवस्था की जाएगी। यह व्यवस्था शहर की सभी वाटिकाओं में करने की जरूरत है।

6 फरवरी को प्रकाशित खबर

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