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13 हजार सरकारी स्कूलों को पं. दीनदयाल उपाध्याय की ग्रंथावली खरीदने के आदेश, 6 करोड़ होंगे खर्च

5 वर्ष पहले
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भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष महेश शर्मा हैं ग्रंथावली के संपादक

सत्ताधारीदलभारतीय जनता पार्टी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 15 खंडों की ग्रंथावली प्रदेश के 13 हजार सरकारी माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में रखने के आदेश जारी दिए हैं। इस ग्रंथावली को खरीदने में स्कूलों के विकास कोष से 6 करोड़ रुपए खर्च होंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि आमतौर पर जरूरी पत्र-पत्रिकाओं के लिए राज्य सरकार से हर साल प्रत्येक स्कूल में मात्र 2500 रुपए मिलते हैं, जबकि इस सेट का मूल्य 4500 रुपए है। जहां शिक्षाविदों ने सरकार के इस फरमान को किसी विचारधारा विशेष को शिक्षा में थोपना बताया है वहीं इस पर प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भले ही जनसंघ के संस्थापक थे, लेकिन इससे इतर वे एक प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक थे। इस नाते सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि विपक्ष सहित अन्य दलों और विचारधाराओं के लोग भी उनका सम्मान करते हैं।

^यह ग्रंथावली एक विचारधारा वाली हैै। पुस्तक लाने के लिए एक जांच कमेटी होनी चाहिए जो यह देखे की कौनसी पुस्तक आनी चाहिए और कौनसी नहीं। पुस्तकालय में विवेकशील और तार्किक सोच वाली पुस्तकें होनी चाहिए जो बच्चों में प्रजातांत्रिक मूल्यों की जानकारी लाए और वैज्ञानिक ढंग से सोचने का नजरिया हो। -प्रो.सुधा चौधरी, दर्शनशास्त्री

विभाग को अधिकार है

^विभागका अधिकार है पुस्तकें खरीदने का। पहले भी खरीदी गई हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय देश के चिंतक रहे हैं। लोकतंत्र में सभी बालक को विद्वानों की पुस्तकें पढ़ने का अधिकार है। -वासुदेवदेवनानी, शिक्षा राज्य मंत्री, राजस्थान

13659 स्कूलों में खर्च होंगे 6 करोड़ रुपए

प्रदेशमें 13659 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय है जिसमें 43 लाख 51 हजार 895 छात्र है। सभी विद्यालयों में इस सैट को खरीदने पर विकास कोष से 6 करोड़ 14 लाख 65 हजार 500 रुपए खर्च हाेंगे।

पहले मिलते थे 2500, उपाध्याय की पुस्तकों के लिए होंगे 4500 खर्च

वर्तमानमें प्रत्येक माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को बीकानेर निदेशालय से हर वर्ष पत्र-पत्रिकाएं खरीदने के लिए 2500 रुपए का अनुदान दिया जाता है। लेकिन उपाध्याय की ग्रंथावली के लिए अलग से आदेश जारी कर विकास कोष से 4500 रुपए के सेट खरीदने को कहा है। हालांकि रमसा से हर विद्यालय को 50 हजार रुपए अनुदान दिया जाता है। इसमें 10 हजार रुपए तक का अनुदान पत्र -पत्रिकाओं को खरीदने के लिए दिया जाता है।

15 खंडों कीइस ग्रंथावली के संपादक भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सभा सदस्य महेश शर्मा हैं। साथ ही दिल्ली के प्रभात प्रकाशन ने इस ग्रंथावली को प्रकाशित किया है। इस ग्रंथावली में दीनदयाल की जीवनी, उनके संघर्ष, उनके किए कार्य और एकात्म मानववाद का उल्लेख है। साढ़े पांच हजार पृष्ठ की पुस्तक हैं।

विकास कोष की राशि से होगा भुगतान

इसमेंखास बात यह है कि एक आदेश में आया कि जिन माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भाषा और पुस्तकालय विभाग के सहयोग सार्वजनिक पुस्तकालय संचालित हैं, उनमें इस ग्रंथावली के सेट का क्रय इसी विभाग से किया जाएगा। दूसरे आदेश में विद्यालय विकास कोष की राशि से सेट को खरीदने के लिए कहा गया है। जबकि यह कोष कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र से हर साल 100 रुपए ली जाने वाली राशि से बनता है।

एकपुस्तक 400 रुपए की, 4500 का सेट : आदेशमें जिस ग्रंथावली को खरीदने के लिए कहा है उसमें एक खंड का मूल्य 400 रुपए हैं लेकिन दुकानदार छूट में 300 रुपए तक में दे रहे हैं। 15 ग्रंथावली का यह सेट 4500 रुपए में मिलेगा।

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