सारी सरहदों को झूठा बता कर निदा हुए विदा
उदयपुर | झूठीसारी सरहदें... गजल सुनाकर मशहूर गजल गायक निदा फाजली झीलों के इस शहर में पिछले साल अपनी आखिरी याद छोड़ सोमवार को दुनिया से विदा हो गए। मशहूर गजलकार निदा फाजली आखिरी बार उदयपुर में अपने चाहने वालों से 6 जून 2015 को लोककला मंडल में मुखातिब हुए थे। उन्होंने मुशायरा “जश्न परवाज’ में इंसानियत और प्रेम के दोहे सुनाकर लोगाें का दिल जीत लिया था। फाजली ने “झूठी सारी सरहदें, धोखा हर तकसीम, दिल्ली से लाहौर तक कड़वे सारे नीम’ कविता से लोगों के दिलों में अनूठी छाप छोड़ी थी। उन्होंने “मैं रोया परदेस में भीगा मां का प्यार, पूजा घर में मूर्ति मीरा के संग श्याम और “जिसकी जितनी चाकरी उतने उसके दाम’ जैसी कविताओं सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया था। कार्यक्रम के बाद इनसे एक पल मिलने की होड़ मची थी।
कार्यक्रम में उनके साथ इंदौर के शायर डॉ. राहत इंदौरी, बरेली के वसीम बरेलवी, जोधपुर के शीन काफ निजाम और मुम्बई के शकील आजमी सहित कई ख्यात कवि और शायर थे।