मंदिरों में चढ़ावे का हिसाब नहीं, गड़बड़ी का आरोप
धर्मोत्सवसमिति मेवाड़ ने मंदिरों में भक्तों के चढ़ावे का कोई हिसाब नहीं होने और इसमें देवस्थान विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
इस संबंध में सोमवार को समिति पदाधिकारियों ने देवस्थान के अधीन मंदिरों की दुर्दशा पर ध्यान आकर्षण करने को लेकर कलेक्टर रोहित गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। इधर, देवस्थान विभाग के आयुक्त अशोक यादव का कहना है कि आरोप बेबुनियाद है। जो भी चढ़ावा आता है उसका पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है। मेवाड़ समिति अध्यक्ष दिनेश मकवाना ने बताया कि देवस्थान विभाग के अधिकारियों को विभाग के अधीन मंदिरों की दुर्दशा अव्यवस्थाओं के बारे में कई बार बताया गया, लेकिन ठोस निर्णय नहीं हुआ। विभाग की मिलीभगत से मंदिरों की दुर्दशा और बिगड़ रही और लूट भी हो रही है। समिति ने चेतावनी दी है कि ध्यान नहीं दिया तो आगे प्रभावी रणनीति बनाई जाएगी।
समिति के मनोज मेहता और राजेन्द्र श्रीमाली ने बताया कि जगदीश मंदिर में पिछले चार वर्षों से भक्तों के चढ़ावे में दिए गए जेवरों का कोई हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं है। जबकि मंदिर के चढ़ावे में आने वाले प्रत्येक आभूषणों का इंद्राज (एंट्री) अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि गत चार साल में लाखों रुपए चढ़ावे में आए हैं, लेकिन विभाग के कर्मचारी और सेवादार की मिलीभगत से सरकार को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। समिति पदाधिकारियों ने ज्ञापन में केबल ऑपरेटर्स के लगाए जा रहे सेटअप बॉक्स का बिल नहीं देने का भी विरोध जताया और बिल दिलवाने की मांग की।
चढ़ावे का रखते हंै पूरा रिकार्ड
^देवस्थानविभाग पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं। मंदिर में जो भी चढ़ावा आता है विभाग में उसका पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है। अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन की संयुक्त कमेटी की निगरानी में ही दान पेटियों को खोला जाता है। पूरे प्रबंधन पर निगरानी होती है। अशोकयादव, आयुक्त, देवस्थान विभाग