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भील प्रदेश नहीं, आदिवासी राज्य बनाओ : नंदलाल मीणा

5 वर्ष पहले
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पॉलिटिकल रिपोर्टर | उदयपुर-जयपुर

जनजातिमामलों के कैबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा ने कहा है कि अनुसूचित जनजाति के तहत आने वाली सभी जातियों को एक साथ आकर प्रदेश में अलग आदिवासी राज्य की स्थापना करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि केवल भील प्रदेश बनाने की मांग तर्क संगत नहीं है। मीणा और अन्य नेताओं की मांग है कि उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और सिरोही को लेकर आदिवासी राज्य बनाया जाए। ऐसा माना जा रहा है कि मीणा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं और वे कैबिनेट मंत्री के बजाय अब मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा करने के लिए यह मांग उछाल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि मैं इस सरकार में मंत्री बन गया तो इसका मतलब ये नहीं कि मैंने अपने आपको किसी के गिरवी रख दिया।

मीणा ने हाल ही में डूंगरपुर में एसबीपी कॉलेज के छात्रसंघ उद्घाटन समारोह में अलग से आदिवासी राज्य बनाने की पैरवी कर चुके हैं। तब उन्होंने कहा था कि भील प्रदेश की मांग उचित नहीं है, क्योंकि किसी भी जाति के नाम पर कोई राज्य नहीं बनता। लेकिन आदिवासी राज्य की मांग करने में कोई परहेज नहीं है। लेकिन यह तभी संभव है, जब हम संगठित हों। मीणा ने साफ शब्दों में कहा कि मुझे अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है।

मीणा बोले : ऐसे बने आदिवासी राज्य

मीणाने कहा कि 1976 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत के समय समाज कल्याण विभाग से अलग करके जनजाति विभाग बनाया गया था। अब भील, मीणा, डामोर, गरासिया, सहरिया आदि आदिवासी जातियों को एक साथ लेकर आदिवासी राज्य की परिकल्पना साकार की जा सकती है। नंदलाल मीणा ने तर्क दिया कि गुर्जर जब आरक्षण की मांग करें, समानता मंच के जरिये ब्राह्मण-राजपूत नेता सरकारों में कर्ताधर्ता बनें तो मैं आदिवासी राज्य की बात क्यों करूं।

मेवाड़-वागड़राज्य की भी है मांग

क्षेत्रमें मेवाड़-वागड़ राज्य की मांग काफी समय ये चल रही है। इसमें उदयपुर संभाग पूरा और सिरोही तथा पाली जिले के बाली क्षेत्र को मिलाकर नया राज्य बनाने की मांग है। इससे राजधानी से सुदूर इस इलाके का विकास हो सकता है।

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