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राजा होना सुख का मार्ग नहीं!

5 वर्ष पहले
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नाटक \\\"चाणक्य\\\' में अभिनेता मनोज जोशी ने अपने अभिनय से जीता दिल और बताया

नाटक का मंचन

छल-कपट और कूटनीति से निकलती है सत्ता की राह

भारतीयलोक कला मंडल में शनिवार को नाटक \\\"चाणक्य\\\' का मंचन हुआ। इसमें अभिनेता मनोज जोशी ने अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत लिया और नाटक से साबित किया कि छल-कपट और कूटनीति से कैसे राजसत्ता हासिल की जाती है। दो घंटे चले इस नाटक की कहानी महाभारत में अर्जुन के मार्गदर्शक बने श्रीकृष्ण जैसी ही थी। कौटिल्य मनोज जोशी बने।

नाटक के दौरान उन्होंने राष्ट्र की भलाई के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य को मगध का राजा बनाने के लिए अपनी कूटनीति, छल और कपट की विद्या दिखाकर सभी को चकित कर दिया। नाटक में कौटिल्य ने अपनी कूटनीतिक विद्या से चन्द्रगुप्त को उनके ही बड़े भाई यानी मगध के राजा हिरण्य गुप्त की मृत्यु करवाई। क्योंकि हिरण्य गुप्त की प्रजा में लोग बहुत दुखी थी और कौटिल्य शांति चाहता था। ग्रुप चेयरमैन और पीआई इंडस्ट्रीज के प्रमुख सलिल, अरविंद सिंघल संजय सिंघल भी मौजूद रहे।

नाटक में चन्द्रगुप्त जब बड़ी परेशानियों को देखते हुए युद्ध के लिए मना करता है तो कौटिल्य उसे समझाते हैं कि राजा होना सुखी होने का मार्ग नहीं है उसे तो प्रजा के लोगों काे सुख देने की लालसा होनी चाहिए। हिरण्य से युद्ध लड़ने के लिए सेना नहीं होने पर कौटिल्य आदिवासियों का सहारा लेता है और धीरे-धीरे एक-एक राजाओं से संधि करके मगध को जीत लेता है। इस दौरान कौटिल्य की चतुराई से हर कोई आश्चर्य में पड़ जाता है। कौटिल्य जो भी चाल चलते हैं वह सफल होती जाती है। आखिरकार जब मगध के राजा के रूप में चन्द्रगुप्त मौर्य का अभिषेक होता है तो पूरे प्रांगण में तालियां गूंजने लगती है।

चाणक्य पर आधारित नाटक मंचन किया गया।

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