मैयत की बेकद्री मामले में मुकदमा दर्ज
बोलने से बच रहे समाज के प्रतिनिधि
उदयपुर | खांजीपीरनिवासी 88 वर्षीय मुहम्मद यूसुफ के सुपुर्दे खाक किए गए शव को मंगलवार को कब्रिस्तान से निकाल कर मैयत की बेकद्री के मामले में बुधवार को हाथीपोल पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने मुहम्मद सिलावट भाई समेत अन्य पर आईपीसी की धारा 297 और 270 के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें दफनाने वाली जगह पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप शामिल है। बुधवार को मुस्लिम समाज का एक तबका मैयत की बेकद्री के विरोध में उतर आया है। बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज के लोग एसपी ऑफिस पहुंचे। इन लोगों ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह इस्लाम की नहीं बल्कि इंसानियत की तौहीन है। इन लोगों ने बताया कि अपने धर्म को तो छोड़ दें, दूसरे धर्म के लोगों के साथ भी ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। मोइनिया इस्लामिक एजुकेशन सोसाइटी, उदयपुर के मुहम्मद अली ने बताया कि दफनाए गए शव को आमतौर पर कब्र से निकालना इस्लामिक शरीयत के खिलाफ है। इससे स्थानीय मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। ज्ञापन में मुहम्मद यूसुफ के परिजनों के लिए सुरक्षा की भी मांग की गई है। उधर, मुहम्मद यूसुफ के परिजनों का कहना है कि हम कोई फसाद नहीं चाहते, बस अमन चाहते हैं, ताकि आगे किसी के साथ ऐसा हो।
इस पूरे मामले में समाज की अगुवाई करने वाले लोग बोलने को राजी नहीं हैं। अश्विनी बाजार स्थित खाई कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले और कमेटी के सदस्य मुहम्मद भाई ने बताया कि उनकी गैर-मौजूदगी में यह घटना हुई। समाज के कुछ युवकों ने यह काम किया।
यह है मामला : मंगलवारको मोली व्यवसायी और खांजीपीर निवासी 88 वर्षीय मुहम्मद यूसुफ के दफनाए शव को कुछ लोगों ने वापस निकालकर उनके घर पहुंचा दिया। वे यूसुफ को वहाबी या देवबंदी बताते हुए सुन्नी कब्रिस्तान में दफनाए जाने का विरोध कर रहे थे। बाद में उनके बेटे ने मंदसौर में उनके पैतृक गांव में उन्हें सुपुर्दे खाक किया।
उदयपुर. कब्रिस्तानमें हुई घटना के बाद बुधवार को समाज के कुछ लोगों ने इसके विरोध में एसपी को ज्ञापन दिया।
उदयपुर. घटनाके विरोध में एसपी को ज्ञापन देने पहुंचे लोग।