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पुरोहितों का तालाब बन रहा पर्यटन स्थल, सीधी एप्रोच रोड संकेतक बोर्ड, भटक जाते हैं पर्यटक

5 वर्ष पहले
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अधिकारियों का भी ध्याननहीं गया

पुरोहितोंका तालाब को पर्यटन स्थल बना रहे हैं। तालाब के विकास पर यूआईटी 87 लाख का खर्च कर रही है। काम अंतिम चरण में है, लेकिन यहां पहुंचने के लिए तो सीधी एप्रोच रोड बनी और ही रास्ते पर संकेतक बोर्ड लगे हैं। बीच रास्ते में ही पर्यटक भटक जाते हैं। जब से गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने निर्देश दिए हैं तब से प्रशासन और यूआईटी ने अंबेरी स्थित पुरोहितों का तालाब के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रखा है, लेकिन अब तक किसी का ध्यान इस तरफ नहींं गया है कि जब एप्रोच रोड ही सही नहीं तो लाेग तालाब तक पहुंचेंगे कैसे।

यूआईटी ने पुरोहितों का तालाब के विकास की योजना बनाकर पिछले साल काम शुरू किया। पाल पर चार छतरियां बनाई गई हैं, मार्बल के दो हाथी स्थापित किए गए हैं। पाल पर ही छोटा गार्डन विकसित किया जा रहा है। करीब एक किलोमीटर पेवर काम भी हुआ है। सीधी एप्रोच रोड नहीं होने पर लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद लोगों की यहां आसान पहुंच संभव नहीं होगी। पुरोहितों की तालाब की खासियत यह है कि यह शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर पहाड़ियों की बीच स्थित है, इसमें साल भर पानी भरा रहता है।

यह हो सकता है समाधान

पुरोहितोंका तालाब की पाल के ठीक सामने से हाइवे तक जमीन खाली पड़ी है। ऐसे में इस जमीन से होकर तालाब तक सीधी एप्रोच रोड बन सकती है। भविष्य में यहां निर्माण होने पर यह काम मुश्किल होगा।

उदयपुर-नाथद्वारा हाइवे से पुरोहितों का तालाब तक करीब ढाई किमी की दूरी है। रास्ते में कहीं पर संकेतक बोर्ड नहीं है। इस रास्ते के बीच गांव की तंग सड़क भी है। उदयपुर-नाथद्वारा हाइवे पर अमरख जी महादेव मंदिर के कुछ आगे कट के पास भी कोई संकेतक बोर्ड नहीं है। इस कारण कई लोग चीरवा टनल तक पहुंच जाते हैं और वहां से गलत दिशा होकर वापस लौटना पड़ता है। कटारिया के साथ कलेक्टर और यूआईटी अधिकारी अब तक कई बार तालाब तक गए हैं, लेकिन किसी का ध्यान इस तरफ नहीं जा पाया।

उदयपुर . पुरोहितों का तालाब का काम जोराें पर है। हाथी की प्रतिमा तैयार हो गई है। अन्य कार्य प्रगति पर हैं।

^यूआईटी ने पुरोहितों के तालाब के विकास का काम हाथ में लिया है। जो कुछ कमियां है उनको दूर किया जाएगा। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि लोगों को तालाब की पाल तक पहुंचने सुगम एप्रोच रोड की सुविधा मिले। रामनिवासमेहता, सचिव, यूआईटी

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