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जैसेही उनके अंगों के काम करने की खबर आई, एक महिला और पूर्व सैनिक ने उन्हें किडनी देने की पेशकश कर दी। सेना के बचाव दल ने हनुमनथप्पा को सोमवार को 35 फीट बर्फ के नीचे से निकाला था। मंगलवार से वे दिल्ली के आर्मी अस्पताल में हैं। डॉक्टरों ने बुधवार को मेडिकल बुलेटिन जारी की। इसमें कहा, ‘हनुमनथप्पा की हालत गंभीर है। उनकी किडनी और लिवर ने काम करना बंद कर दिया है। ब्रेन में ऑक्सीजन की कमी है। फेफड़े निमोनिया की चपेट में हैं। अगले 24 घंटे उनके लिए अहम होंगे।’
खुदही संघर्ष वाले क्षेत्रों में पोस्टिंग लेते रहे हनुमंतप्पा
सेनाके एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हनुमंतप्पा 2002 को मद्रास रेजीमेंट की 19वीं बटालियन में शामिल हुए थे। उन्होंने शुरुआत से ही चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को चुना। वे 2003 से 2006 के बीच कश्मीर में आतंकरोधी अभियान में शामिल थे। फिर 2008 से 2010 के बीच स्वेच्छा से 54वीं राष्ट्रीय राइफल्स में सेवा देने की बात कही। इसके बाद 2010 से 2012 के बीच पूर्वोत्तर में स्वेच्छा से सेवा दी। दिसंबर 2015 में उन्होंने सियाचिन की सर्वाधिक ऊंची चौकियों में से एक पर अपनी तैनाती को चुना।’
स्कूलकी मदद में रहते थे आगे
हनुमंतप्पाके बारे में प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर एमएफ कराजाजी ने बताया कि वे हमेशा स्कूल की मदद करते थे। पिछले साल ही बच्चों को 250 बेल्ट और टाई बांटी थी। इससे पहले भी वे अपने तरीके से बच्चों की मदद करते थे।
खबरआए इसलिए काट दिया था केबल
सियाचिनमें जब हिमस्खलन की खबर आई तो हनुमंतप्पा के परिवार वाले चिंतित हो उठे। परिवार के पुरुष सदस्यों ने केबल कनेक्शन काट दिया ताकि उनकी मां बासम्मा और प|ी महादेवी कोई सदमे भरी खबर सुन पाएं। खुद सेना के साथियों से समाचार लेते रहे। जब उनके जीवित होने की खबर मिली तो केबल कनेक्शन जोड़ दिया।