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स्कॉलर उत्पीड़न में महिला आयोग करेगा कुलपति तक सभी जवाबदेह लोगों को तलब

5 वर्ष पहले
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सुखाड़ियाविश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में रिसर्च के दौरान यौन सहित विभिन्न तरह के उत्पीड़न का शिकार हुई पीएचडी स्कॉलर के मामले में राज्य महिला आयोग कुलपति सहित कार्रवाई नहीं करने वाले सभी जवाबदेह अधिकारियों को तलब करेगा। विवि के प्रो. रईस अहमद पर इस स्कॉलर से उत्पीड़न करने के आरोप हैं। इस उत्पीड़न के मामले में ऑडियो भी वायरल हो चुके हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने इस प्रकरण में 11 महीने से ज्यादा समय हो जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर हैरानी जताई और कहा कि वे इस प्रकरण की रिपोर्ट मंगवा रही हैं। उन्होंने इस पर अाश्चर्य व्यक्त किया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में यौन उत्पीड़न समितियां होने के बावजूद इस तरह के प्रकरण सामने रहे हैं।

रिसर्चस्कॉलर कहती हैं : मैंबार-बार रिमाइंडर पर रिमाइंडर भेज रही हूं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। लेकिन मैं यह लड़ाई लड़ना बंद नहीं करूंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बार-बार जांच के नाम पर मामले पर लीपापोती की है। अब विश्वविद्यालय ने सिटिंग मजिस्ट्रेट से जांच कराने को लेकर राज्य सरकार को लिखा है, जिसकी मंजूरी अबतक नहीं मिली है। विवि चाहता है कि मैं पीएचडी पूरी कर यूनिवर्सिटी से चली जाऊं और मामला अपने आप खत्म हो जाए। यह प्रकरण पिछले साल फरवरी-मार्च के दौरान उर्दू विभाग में पीएचडी स्कॉलर का अपने सुपरवाइजर प्रो. रईस अहमद द्वारा उत्पीड़न का मामला सामने आया था।

जांच की मंजूरी नहीं मिली : त्रिवेदी

^मजिस्ट्रेटजांच बिठाने के लिए सरकार को लिखा है। अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। -आईवी त्रिवेदी, कुलपति

11 माह से ऐसे चल रही है जांच की प्रक्रिया

}24मार्च 2015 : शोधछात्रा ने प्रो. रईस के खिलाफ शिकायत पीजी डीन सीमा मलिक को दी।

}26 मार्च2015 : शिकायतइंटरनल कंप्लेंट कमेटी के पास पहुंची। कमेटी ने 1 माह 3 दिन बाद शिकायत पर अपना पक्ष विवि प्रशासन को दिया। प्रोफेसर पर लगे आरोपों को दरकिनार करते हुए महज सुपरवाइजर बदलने की सलाह दी।

}26 मार्च2015 : शोधछात्रा द्वारा की गई शिकायत की दूसरी कॉपी उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. हदीस अंसारी के पास भी 26 मार्च को पहुंची। उन्होंने भी 24 दिन तक शिकायत अपने पास दबाए रखी।

}शिकायत 20 अप्रैल को प्रो. रईस के पास भेज जवाब मांगा, जिस पर प्रो. रईस ने जवाब नहीं दिया। विभागाध्यक्ष ने इसकी सूचना इस मामले में बवाल मचने पर दी।

}अक्टूबर 2015: रिटायर्डआरएस कैलाश वाजपेयी ने जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें रईस अहमद की सिर्फ एक इंक्रीमेंट रोकने की बात कही। विवि ने किया दोबारा जांच कराने का फैसला।

मंत्रियों ने सिर्फ दिए बयान, नहीं ली सुध

पिछलेसाल मामला तूल पकड़ने के बाद प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ, जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी, सांसद अर्जुनलाल मीणा, विधायक फूलसिंह मीणा ने कार्रवाई करवाने की बात कही थी। बाद में किसी ने कोई सुध नहीं ली। पीएचडी स्कॉलर ने बताया कि हाल में मंत्री कालीचरण सराफ निंबाहेड़ा कॉलेज में आए थे, जहां मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।

कुलपति ऐसे बचाते रहे प्रोफेसर को

>विश्वविद्यालयप्रशासन ने सबसे पहले आंतरिक शिकायत कमेटी से जांच कराई। कमेटी ने रईस अहमद को दोषी करार दिया और रिपोर्ट विवि प्रशासन को सौंप दी। कुलपति ने इस पर कार्रवाई करने के बजाय जांच आरएएस अधिकारी से करवाने की प्रक्रिया शुरू करवाई।

>रिटायर्ड आरएएस ने जांच में रईस अहमद को दोषी पाया। लेकिन सजा के ताैर पर सुझाव दिया एक इंक्रीमेंट रोकने का। फिर भी कुलपति ने दोषी करार देने वाली इस रिपोर्ट के अाधार पर कार्रवाई नहीं की। तय किया कि उच्च अधिकारी से नई जांच कराएंगे। लेकिन नहीं कराई।

>तीन महीने पहले 6 नवंबर को बोम की बैठक में छात्रनेताओं और सदस्यों के दबाव में जांच मजिस्ट्रेट से कराने की घोषणा की। दो महीने से ज्यादा बीते, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

महिला डीन ने भी नहीं दिया साथ

विश्वविद्यालयमें लोगों का कहना है कि महिला डीन होने के बावजूद पीएचडी स्कॉलर को कोई मदद नहीं मिली। आंतरिक शिकायत कमेटी की समन्वयक मीना गौड़ कहती हैं, हमने रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। अब पीड़िता फिर से शिकायत करेगी तो कुछ करेंगे।

दोषीको मिलता रहा संरक्षण

कुलपतिआईवी त्रिवेदी ने पहले कहा था कि यह गंभीर बात है, मैं दोषी को बख्शूंगा नहीं। ऑडियो सुनने के बाद उन्होंने कहा था कि कोई प्रोफेसर ऐसा कैसे कह सकता है। सख्त से सख्त कार्रवाई करूंगा। पुलिस ने रईस अहमद के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 बी और गैरकानूनी काम करने के लिए धमकाने के आरोप में आईपीसी की धारा 327 के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। लेकिन पुलिस ने भी कुछ नहीं किया।

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