लेकसिटी में 13 साल की कोशिश से खिले हॉलैंड के फूल
लेकसिटीकी आबोहवा विदेशी फूलों के लिए अनुकूल साबित होने लगी है। हॉलैंड और देश के उत्तरी इलाकों के ठंडे क्षेत्रों में होने वाली लिलियम किस्म के फूलों की खेती यहां 13 सालों के प्रयास के बाद नीना बोल्या ने संभव की है। वे इसकी एक कली सौ रुपए तक बेच रही हैं।
लेकसिटी और यहां की अरावली की पहाडिय़ों के बीच कई विदेशी फूलों की किस्में खिल रही हैं। नीना और उनके परिवार का दावा है कि राजस्थान में लिलियम फूलों की खेती और कहीं नहीं होती है। अब तक हॉलैंड और देश के उत्तरी इलाकों में जहां तापमान बेहद ठंडा और वेरिएशन वाला रहता है वहीं पर यह पौधा अच्छी बढ़वार ले पाते हैं।
लिलियम की खेती करती महिला।
पिछले महीने का बदला मौसम रहा मददगार
नीनाबताती है कि कि पिछले महीने में बदला मौसम भी लिलियम के लिए काफी मददगार साबित हुआ। लिलियम के पौधे कृत्रिम परिस्थितियों में उगाए जाते हैं, लेकिन उन्होंने प्राकृतिक परिस्थितियों में इसकी खेती की है। इसके लिए उन्होंने कुछ प्लांट ग्रोथ रेग्युलेटर की भी सहायता ली। अब वे इन पौधों को मल्टीप्लाई करने और अगले सीजन के लिए प्रिजर्व करने के लिए विभिन्न तकनीकों से पौधों को फ्रीज करने के प्रयास कर रही है। इसके लिए अब तक वे हॉलैंड से बल्ब मंगवाते हैं।
किसानों के लिए हो सकता है फायदेमंद
विशेषज्ञोंके अनुसार छोटे-छोटे खेतों में जहां गेहूं, सरसों आदि की खेती से ज्यादा लाभ की संभावना नहीं होती वहां किसानों के लिए इस तरह की खेती आर्थिक प्रगति में फायदेमंद साबित हो सकती है। उतने ही स्थान पर लिलियम या अन्य विदेशी फूलों से वे लाभ कमा सकते हैं। लिलियम के फूलों की डिमांड पांच से सात सितारा होटलों के रिसेप्शन और रूम डेकोर में इस्तेमाल होता है। लेकसिटी में भी कई होटलों में इन फूलों की डिमांड रहती है।
एकहजार रुपए किलो तक बिकते हैं हर्ब्स
नीनाने अपने फार्म में कई फलों, सब्जियां, फूलों के अलावा 18 प्रकार के हर्ब्स की भी खेती की है। कई व्यंजनों का जायका बढ़ाने वाले धनिया और पुदीने की खेती के साथ ऑरेगेनो, रोजमैरी, मेजोरम, फैनल, थाइम, बैंजिल सहित 18 किस्मों की हर्ब्स उगाई हैं। बताया गया कि इनमें से ज्यादातर हर्ब्स की बाजार में कीमत 100 रुपए प्रति 100 ग्राम है।