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सिफारिश पर मिली थी फर्स्ट जॉब, ऐसे बनाई वर्ल्ड की चौथी बिगेस्ट फार्मा कंपनी

डाॅ. देशबंधु गुप्ता ने राजस्थान के अलवर में पढ़ाई पूरी कर बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ पिलानी में नौकरी शुरू की और मुंबई में बंद पड़ी लुपिन कम्पनी को खरीदकर दवाई बनाने का कारोबार शुरू किया था

Dainik Bhaskar

Jun 27, 2017, 02:52 AM IST
Lupin Pharmaceuticals founder Deshbandhu Gupta passed away
उदयपुर. देश के नामचीन इंडस्ट्रियलिस्ट और सोशलिस्ट डाॅ. देशबंधु गुप्ता का 79 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने राजस्थान के अलवर में पढ़ाई पूरी कर बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ पिलानी में नौकरी शुरू की और मुंबई में बंद पड़ी लुपिन कम्पनी को खरीदकर दवाई बनाने का कारोबार शुरू किया था। आज यह कम्पनी देश की दूसरी और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी फार्मा कम्पनी है। सिफारिश पर मिली थी फर्स्ट जॉब...
- डाॅ. देशबन्धु गुप्ता का जन्म अलवर जिले के राजगढ़ कस्बे में 8 फरवरी 1938 में हुआ। मूल रूप से डाॅ. गुप्ता का परिवार रामनगर गांव का था, लेकिन इनके पिता प्यारेलाल अपने मामा के यहां राजगढ़ गोद आ गए थे।
- वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे। 20 साल की उम्र में ही उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई शुरू कर दी थी।
- केमिस्ट्री में एमएससी की डिग्री के बाद देशबंधु जब वे करियर की तलाश में थे, तब उनके फूफा बाबूलाल गुप्ता ने अपने बहनोई ओमप्रकाश गुप्ता, जो कि भरतपुर रियासत के महाराजा ब्रजेंद्रसिंह के एडीसी थे ने महाराजा ब्रजेंद्रसिंह से मुलाकात कराई।
- महाराजा ने गुप्ता जी की प्रतिभा से प्रभावित होकर इंडस्ट्रियलिस्ट घनश्यामदास बिड़ला से तुरंत फोन पर सिफारिश की और उन्हें बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी में लेक्चरर की पोस्ट मिली।
- इसके बाद उन्होंने मुंबई आकर ब्रिटेन की एक दवा कंपनी में काम किया। यहीं उन्हें अपनी दवा कंपनी खोलने का आइडिया आया और 1968 में महज पांच हजार रु. में ल्यूपिन की शुरुआत की थी।
- बाद में उनकी अगुआई में ही ल्यूपिन देश की टॉप फार्मा कंपनियों में शामिल हुई। उन्होंने ग्रामीण भारत में विकास को बढ़ावा और गरीबी खत्म करने को लेकर ल्यूपिन ह्यूमन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी।
- कंपनी के मुताबिक उनकी कोशिशों से देश के 3,463 गांवों के 28 लाख परिवारों की जिंदगियों में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिली। उनकी कंपनी फिलहाल डायबिटीज, अस्थमा, एड्स, हार्ट अटैक और टीबी की दवाएं बना रही है। इस समय ल्यूपिन दुनिया में टीबी की दवाओं की सबसे बड़ी कंपनी भी है।
कंपनी की मार्केट वैल्यू 48,000 करोड़ रु. और 100 देशों में है कारोबार
- ल्यूपिन की मार्केट कैपिटल करीब 48 हजार करोड़ रु. है। देश में उसकी 8 फैक्ट्रियां गोवा, तारापुर, अंकलेश्वर, जम्मू, मंडीदीप, इंदौर, औरंगाबाद और वडोदरा में हैं, जबकि एक फैक्ट्री जापान के सैंडा में है।
- वह अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की पांचवीं सबसे बड़ी सप्लायर है। कंपनी की करीब 30% इनकम डोमेस्टिक मार्केट से होती है। देशबंधु को अर्न्स्ट एंड यंग ने 2011 का आंत्रप्रेन्योर का ‘विजनरी लीडर अवार्ड’ दिया था। 2014 में फोर्ब्स मैगजीन ने अमीर लोगों की लिस्ट में उन्हें 308वीं रैंकिंग दी।
गरीबी को बहुत नजदीक से देखा था
- डॉ. गुप्ता ने फार्मा कम्पनी के कारोबार के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा कि बीमारों को किफायती दाम पर बेहतर क्वालिटी की दवाइयां मिले।
- मेडिसिन मेन्युफैक्चरिंग में एम्पायर खड़ा करने के बाद भी वे अपने शहर और गरीबी के दिन नहीं भूले थे। अपने बिजी शेड्यूल से उन्हें भी जब भी मौका मिलता, वे अपने शहर आते रहते थे।
- उनके पूर्व विदेश मंत्री नटवरसिंह से भी अच्छे ताल्लुकात थे। उनके कहने पर डाॅ. देशबंधु गुप्ता ने 2 अक्टूबर 1988 में भरतपुर के ग्रामीण इलाकों के डवलपमेंट के लिए लुपिन ह्यूमन वेलफेयर एण्ड रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की।
- यह एनजीओ अब देशभर में 35 से ज्यादा जगहों पर काम कर रही है। इसके बजट का अनुमान इसी से लगा सकते है कि महाराष्ट्र के धुले गांव के डवलपमेंट के लिए उन्होंने पर्सनल फंड से 500 करोड़ रुपए दिए।
- भरतपुर में 1990 में आरबीएम अस्पताल में 25 लाख रुपए देकर एक ब्लाॅक का बनवाया था। इसका बोर्ड अभी भी आरबीएम में लगा हुआ है।
- डाॅ. देशबंधु गुप्ता के फुफेरे भाई पवन खंडेलवाल ने बताया कि गुप्ता जी ने गरीबी को बहुत नजदीक से देखा था। इसलिए वे गरीबों की भलाई के लिए हमेशा तैयार रहे।
बेटी संभाल रही है पिता का कारोबार
- उनके परिवार में भाई विश्वबन्धु, देशबन्धु, आत्मबन्धु और आध्यात्म बंधु हैं। जबकि, एक भाई का निधन करीब 20 साल पहले ही हो गया। सभी भाई मुंबई में बिजनेस करते हैं।
- उनके 5 बच्चों में बेटा नीलेश, बेटियां विनीता गुप्ता, कविता, अनुजा, रिचा हैं। सभी की शादी हो चुकी है और विनीता गुप्ता विदेश में रहकर लुपिन लिमिटेड के कारोबार को संभाल रहीं हैं।
- बताया जाता है कि डॉ. गुप्ता की अंत्येष्टि मंगलवार को मुंबई में होगी। जिसके लिए उनकी मां शांता देवी और बडे़ भाई श्रवण कुमार मुंबई रवाना हो गए हैं।
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