उदयपुर। कई महीनों की तैयारियों के बाद गुरुवार को शुरु हुआ चार दिन का लेक फेस्टिवल अफसरों की अदूरदर्शिता के कारण आनन-फानन में दो दिन में समेट दिया गया। तीसरे दिन शनिवार को फतहसागर और गणगौर घाट पर होने वाले सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं तो रविवार के आयोजनों को लेकर प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
दरअसल झीलों की नगरी में पहली बार हुए लेक फेस्टिवल के फ्लॉप होने के पीछे अफसरों की अव्यवस्थित कार्ययोजना थी। जिला प्रशासन ने चार दिनों में ही लेक फेस्टिवल के साथ इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल भी रख लिया। म्यूजिक फेस्टिवल 13 फरवरी से शुरू होना है। अब प्रशासन को डर है कि कहीं लेक फेस्टिवल की तरह ही म्यूजिक फेस्टिवल भी फ्लाप नहीं हो जाए। पर्यटन विभाग की उपनिदेशक सुमिता सरोच ने बताया कि म्यूजिक फेस्टिवल को शनिवार को पहला दिन है। इस कारण लेक फेस्टिवल के शनिवार को पूर्व निर्धारित शाम को होने वाला लेजर शो, बैंड शो, नाइट ग्लो, कठपुतली, फायर डांसर, लाइट एंड साउंड शो आदि कार्यक्रम नहीं हो पाएंगे। हालांकि उन्होंने रविवार के बारे में कुछ नहीं कहा है। रविवार को होने वाले कार्यक्रमों के बारे में शनिवार को निर्णय होगा। जिला प्रशासन का पूरा लवाजमा 13 फरवरी को सीएम दौरे की तैयारियों में जुटा हुआ है।
जर्मनी के प्रेम जोशुआ बैंड ने गाई गणपति वंदना
फतहसागर की पाल पर शाम करीब साढ़े पांच बजे ही प्रेम जोशुआ बैंड ने साउंड चैक शुरू किया तो वंस मोर वंस मोर की डिमांड आने लगी। फ्रांस, जर्मनी, जापान और भारत के पांच कलाकारों का ये बैंड करीब 8 बजे फिर स्टेज पर उतरा तो दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। इंग्लिश एसेंट होने के बावजूद बैंड ने गणपति वंदना, शिव वंदना सहित काली और साईं के गीतों को मधुर धुनों में पिरोया। इसके बाद प्रेम जोशुआ ने फ्यूजन से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। जोशुआ कई सालों से भारत में रह रहे हैं। 18 वर्ष की उम्र में वे जर्मनी से भारत आ गए थे। यहां इन्होंने अपना नाम प्रेम रख लिया।
गणगौर घाट किनारे नाव पलटी, हादसा टला
गणगौर घाट किनारे शुक्रवार को एक बोट अनियंत्रित होने से उलटकर पानी में डूब गई। इससे बड़ी घटना होने से टल गई और मौके पर ही दो महिलाओं को बचा लिया गया। दरअसल, घटना दिन में करीब 12 बजे की है। गणगौर घाट किनारे जब एक बोट में दो महिलाएं बैठने लगी, तो अचानक बोट अनियंत्रित हो गई और दोनों महिलाएं पानी में गिर गई। लोगों ने उन्हें चैन बनाकर बचाया। प्रत्यक्षदर्शी सुरेश कोटिया ने बताया कि नाव किनारे वाले हिस्से की ओर नहीं पलटती तो बड़ा हादसा हो सकता था। 8 बोट में दुकानें लगाई गई हैं। इनमें ज्वैलरी, जूट से बने आइटम्स, बुक्स और फल उपलब्ध हैं।
जर्मनी के प्रेम जोशुआ बैंड ने गाई गणपति वंदना
फतहसागर की पाल पर शाम करीब साढ़े पांच बजे ही प्रेम जोशुआ बैंड ने साउंड चैक शुरू किया तो वंस मोर वंस मोर की डिमांड आने लगी। फ्रांस, जर्मनी, जापान और भारत के पांच कलाकारों का ये बैंड करीब 8 बजे फिर स्टेज पर उतरा तो दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। इंग्लिश एसेंट होने के बावजूद बैंड ने गणपति वंदना, शिव वंदना सहित काली और साईं के गीतों को मधुर धुनों में पिरोया। इसके बाद प्रेम जोशुआ ने फ्यूजन से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। जोशुआ कई सालों से भारत में रह रहे हैं। 18 वर्ष की उम्र में वे जर्मनी से भारत आ गए थे। यहां इन्होंने अपना नाम प्रेम रख लिया।
दोपहर बाद नहीं होगा वॉटर स्पोर्ट्स: शनिवार को फतहसागर पर होने वाली कयाकिंग, ड्रेगन बोट आदि की नेशनल चैंपियनशिप को दोपहर 12 बजे तक खत्म कर दिया जाएगा। इसके बाद फतहसागर की पाल पर होने वाले वॉटर स्पोर्ट्स भी दर्शकों को देखने को नहीं मिलेंगे। चारों दिनों तक चलने वाली प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने किट व अन्य संसाधनों के लिए फीस जमा करवाई थी।
उड़ाई 35 प्रकार की पतंगें तहसागर के किनारे पतंगबाजी का क्रेज युवाओं में सिर चढ़ कर बोला। पतंगबाज अब्दुल कादिर, शाबाज खान की टीम ने कुल 35 प्रकार की पतंगे विशेष लेक फेस्टिवल के लिए बनाई है। ये पतंगे बनाने के लिए इन्हें 12 दिनों का समय लगा। शनिवार और रविवार के लिए ये पतंगबाज एक साथ 200 पतंगे उड़ाने वाले थे। अब इन पतंगों का उड़ना संशय में है।
कोई देखने आए न आए, लहरों पर कम नहीं हुआ रोमांच
फेस्टिवल के दूसरे दिन देशभर से आए प्रतिभागियों का जोश देखने लायक था। भले ही दूसरे दिन भी सुबह ड्रेगन बोट व अन्य प्रतियोगिताओं को देखने फतहसागर पर ज्यादा भीड़ नहीं जुट पाई, लेकिन इससे खिलाडिय़ों के हौसले पर कोई असर नहीं पड़ा। इन प्रतिभागियों का उत्साह वर्धन करने खुद प्रशासनिक अधिकारी दोपहर में मुश्किल से पहुंचे पाए।