संघ मुखपत्र ने सम्राट अशोक को बताया खलनायक और बौद्ध राष्ट्रद्रोही

6 वर्ष पहले
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उदयपुर/जयपुर. राजस्थान की स्कूली किताबों में अभी अकबर की महानता को कमतर मानने पर उठा विवाद थमा भी नहीं था कि अब नई कॉन्ट्रोवर्सी शुरू हो गई है। इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक ऑर्गनाइजेशन के माउथपीस में महान सम्राट अशोक को भारतीय इतिहास का खलनायक बताया गया है। यही नहीं, बौद्ध धर्म को लेकर भी आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। क्या है पूरा मामला...
- आरएसएस के ऑर्गनाइजेशन 'राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद' के माउथपीस 'बप्पा रावल' के मई 2016 के अंक में पब्लिश 'भारत : कल, आज और कल' लेखमाला में ये बातें कही गई हैं।
- माउथपीस की संपादक डॉ. राधिका लढ़ा ने यह लेख लिखा है।
- इसमें सम्राट अशोक की महानता पर सवाल करते हुए कहा गया है, "मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक के कारण ही भारतीय राष्ट्र पर बड़े संकटों के पहाड़ टूटे और यूनानी हमलावर भारत को पदाक्रांत करने आ धमके।"
- यह भी कहा गया है, "यह भारत का दुर्भाग्य रहा कि जो अशोक भारतीय राष्ट्र की अवनति का कारण बना, उसकी ही हमने 'अशोक महान' कह कर पूजा की। अच्छा होता कि राजा अशोक भी भगवान बुद्ध की तरह साम्राज्य त्यागकर, भिक्षु बनकर बौद्ध धर्म के प्रचार में लग जाते।"
- इसके विपरीत उन्होंने सारे साम्राज्य को ही बौद्ध धर्म प्रचारक विशाल मठ के रूप में बदल दिया। इन वजहों से ही यूरोप से फिर एक बार ग्रीक हमलावर भारत को कुचलने आ धमके।"
माउथपीस में लिखी बातें सही
- इस बारे में जब भास्कर ने माउथपीस पब्लिश करने वाले ऑर्गनाइजेशन के राज्य संगठन मंत्री राजाराम से सवाल किया तो उन्होंने इसे सही करार दिया।
- राजाराम ने कहा, "माउथपीस में संपादक डॉ. राधिका लढ़ा ने जो लिखा और कहा है, वही सही है।"
कनिष्क को बताया विदेशी
- माउथपीस के लेख में पेज 11 पर बौद्ध धर्म की आलोचना की गई है। जबकि इसी लेख में पेज 12 पर बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले कनिष्क को विदेशी कहा गया है।
- बता दें कि भारतीय इतिहास में अशोक और कनिष्क की गिनती महान शासकों में की गई है।
- भारतीय इतिहासकारों की नजर में हिंसा और युद्ध के माहौल में कुशल प्रशासक अशोक तीन ही साल में शांति स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं।
- दुनियाभर के इतिहासकारों ने उन्हें मानवतावादी भी माना है। यह भी माना जाता है कि उसी दौर में भारत में कई नई चीजों की भी शुरुआत हुई।
इतिहासकार ने आकलन को गलत बताया
- इतिहासकार केएस गुप्ता ने इस पूरे मामले में लेखिका के आकलन को गलत करार दिया।
- उन्होंने कहा, "एक ही गुण या दोष से किसी व्यक्ति का आकलन करना ठीक नहीं। उस वक्त के हालात अलग थे।"
- उन्होंने कहा, "अशोक के बाद सातवीं और आठवीं शताब्दी में भी विदेशी हमले हुए। तब तो अहिंसा की पॉलिसी नहीं थी, फिर किसे दोष देंगे। अवनति की स्थिति का बड़ा कारण आपसी फूट थी।"
इस बारे में लेखिका ने क्या कहा?

- इस बारे में बप्पा रावल की संपादक डॉ. राधिका लढ़ा ने कहा, "अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया, फिर इसे ही राज धर्म बना दिया। विदेशों से जो भी आता, अगर वह बौद्ध होता तो अशोक तुरंत ही उसे अपना मान लेते थे, जो गलत था।"
- लढ़ा के मुताबिक, "उन्होंने (अशोक) इतनी शांति फैलाई कि सीमा पर लगे सैनिक ही हटा दिए। इससे हमले बढ़े और राष्ट्र की उसी वक्त अवनति शुरू हो गई।"
संघ ने दी सफाई, यह आरएसएस का विचार नहीं
- संघ से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता और 'पाथेय कण' मैगजीन के संपादक कन्हैयालाल चतुर्वेदी ने सफाई दी कि यह विचार संघ का नहीं हो सकता। यह व्यक्तिगत है।
- हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, "सम्राट अशोक में अच्छाई थी तो दोष भी थे। उनके आने से भारत में शक्ति पूजा खत्म हो गई। इससे राष्ट्र कमजोर बनता गया और विदेशियों के आक्रमण बढ़ते गए। अकबर और अशोक को महान बताने वाले जो भी इतिहासकार हैं, वे सभी विदेशी हैं, जो भारत को जानते ही नहीं।"
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