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बदहाली के आलम से शहरवासी हुए मायूस, पुलिस में गड़बड़ाया तालमेल

5 वर्ष पहले
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उदयपुर। . लेक फेस्टिवल के पहले दिन कई लाेग फतहसागर पाल पर हुए कार्यक्रम काे नहीं देख पाए। जनता के लिए कार्यक्रम था,मगर ट्रैफिक पुलिस जनता को इधर-उधर भटकाती रही। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ नाकाबंदी के रूप में मुस्तैद थी, मगर उसमें भी अापसी सामंजस्य नहीं था। यूआईटी की तरफ से नीलकंठ महादेव मंदिर से पहले ही वाहनों को रोक दिया गया। ट्रैफिक पुलिस दो पहिया वाहनों चालकों को स्वरूप सागर लिंक नहर की तरफ से जाने का इशारा करती रही। यहां से स्वरूप सागर लिंक नहर की तरफ पहुंचने पर ट्रैफिक पुलिस लोगों को देवाली गेट की तरफ भेजती नजर आई। इधर, कलेक्टर, संभागीय आयुक्त, एसपी और अन्य अतिथियों की गाडिय़ां तो पाल पर लगे स्टेज तक आईं। पर्यटन विभाग के अधिकारी खुद गाडिय़ां अंदर ले जाने के लिए पास मांगते नजर आए। इधर, फोर-व्हीलर की पार्किंग की वयवस्था देवाली छोर पर की थी।
ऐसे सुधर सकती है ट्रैफक व्यवस्था
एक्सपर्ट का कहना है कि यूआईटी चौराहा जहां गाडिय़ां रोकी जा रही थीं, वहां से गोल्फ कार की व्यवस्था करनी चाहिए थी। गोल्फ कार नहीं होने पर छोटे ऑटो लगवाने चाहिए थे। इससे शहरवासियों और पर्यटकों को पाल तक आने में आसानी रहती।
कार्यक्रम में जनता को ही दूर रखा
^मैने स्वयं अव्यवस्था देखी। ट्रैफिक पुलिस वाले टू व्हीलर को भी फतहसागर की तरफ नहीं आने दे रहे थे। जनता के लिए कार्यक्रम था और जनता ही दूर रखा गया। ऐसे फेस्टिवल का क्या मतलब। इस कारण शनिवार और रविवार को आम तौर पर फतहसागर किनारे जितने लोग नजर आते है उतने लोग भी लेक फेस्टिवल के पहले दिन नजर नहीं आए।
दलपत सुराणा, जागरूक नागरिक।
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