उदयपुर. शिक्षा की गुणवत्ता पर मॉनिटरिंग के लिए शिक्षा संबलन कार्यक्रम का पहला चरण बुधवार को संपन्न हुआ। शिक्षाधिकारियों ने दूर दराज गांवों के स्कूलों में शिक्षा के स्तर का जायजा लिया। सी श्रेणी के बच्चे अधिक मिलने पर शिक्षाधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए शिक्षकों को बच्चों पर और अधिक मेहनत करने के लिए पाबंद करते हुए 15 दिनों की मोहलत दी है।
सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक भरत जोशी ने परसाद सीनियर सेकेंडरी स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रायमरी स्कूल के बच्चों को स्तर संतोषजनक नहीं था। उन्होंने बताया कि जहां विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ने में दिक्कतें आई वहीं पांचवीं कक्षा के बच्चे गणित के सामान्य जोड़-बाकी भी नहीं कर पाए। इस पर उन्होंने शिक्षक को पाबंद किया कि बच्चों का स्तर हर हाल में अपग्रेड हो।
अन्यथा सालाना रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी की जस सकती है। संस्कृत शिक्षा के संभागीय अधिकारी डॉ. भगवती शंकर व्यास ने माध्यमिक विद्यालय काय का दौरा किया। उन्होंने बताया कि पांचवीं क्लास के 90 बच्चों में 45 बच्चें सी श्रेणी में मिले। सहायक डीडी परमेश्वर श्रीमाली ने सायरा के बालिका माध्यमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। सहायक डीडी श्रीमाली ने बताया कि कक्षा 3 में 15 बच्चे ही आए थे जिनमें से मात्र 4 बच्चे ही ए ग्रेड के मिले। शेष बच्चे सी श्रेणी के मिले। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को अक्षर ज्ञान में भी दिक्कतें पाई गई। इस पर उन्होंने भी शिक्षकों को 15 दिनों का समय दिया है। उसके बाद उन्हीं बच्चों की फिर से मॉनिटरिंग की जाएगी। इधर, एडीईओ कुंज बिहारी भारद्वाज ने गोगुंदा के तरपाल माध्यमिक विद्यालय विजिट किया। यहां स्थिति संतोषजनक पाई गई। सीसीई के तहत बच्चों के होमवर्क व क्लास वर्क पूरा मिला। वहीं बच्चे बेसिक स्किल्स में कमजोर मिले।
ग्रेड में सुधार लाने के लिए शिक्षकों को मौका
सर्व शिक्षा अभियान ने जिला समन्वयक ने बताया कि एक सत्र में तीन बार संबलन आयोजित होता है। इसी के आधार पर शिक्षकों पर कार्रवाई भी होती है। हर संबलन के बाद शिक्षकों को 15 दिनों का समय दिया जाता है, जिसमें उन्हें बच्चों के ग्रेड में सुधार लाने का मौका दिया जाता है। जोशी ने बताया कि गत सत्र की रिपोर्ट के आधार पर 69 शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं।