उदयपुर. पांच सितारा होटल लक्ष्मीविलास को सस्ते में बेच देने के मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम ने शुक्रवार को उदयपुर आकर जांच की। नगर निगम, यूआईटी, बिजली निगम, गिर्वा पंचायत समिति, सब रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज जुटाकर टीम जोधपुर रवाना हो गई। होटल परिसर में हो रही मशीनों से पहाड़ी की खुदाई की वीडियोग्राफी भी की। हाेटल प्रबंधन ने ब्यूरो अधिकारियों को लैंड स्केपिंग कराना बताया। टीम के साथ सरकारी अधिग्रहण के दौरान सीनियर फ्रंट आॅफिस सुपरवाइजर रहे अंबालाल नायक भी थे।
विनिवेश के बाद वीआरएस लेने वाले नायक ने सीबीआई को कौड़ियों के दाम होटल षड्यंत्रपूर्वक बेचने के सबूत मुहैया कराए थे। सीबीआई के एसपी एन.एस.यादव, डीवायएसपी आर.एस.शेखावत, इंस्पेक्टर प्रमोद पांडे तथा तीन सहयोगियों के दल ने बेचान से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिक प्रतियां हासिल की। नगर निगम से 2006 में होटल में नव निर्माण के लिए दी गई स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज लिए, क्योंकि होटल निर्माण निषेध क्षेत्र में आता है। पीछोला के किनारे स्थित हाेटल लीला वैंचर को 2003 में दी गई निर्माण अनुमति संबंधी दस्तावेज भी प्राप्त किए। यूआईटी से 2000 के बायलाॅज की प्रतियां ली गई। डिप्टी टाउन प्लानर महेंद्र परिहार ने रानीराेड के पास स्थित होटल रेडिसन के निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिक प्रतियां भी ब्यूरो के दल को सौंपी।
बिजली निगम के मधुबन स्थित सब डिवीजन कार्यालय से होटल परिसर से गुजर रही लाइन की श्रेणी तथा खंभों की संख्या से संबंधित दस्तावेज मांगे गए। गिर्वा पंचायत समिति के राजस्व अधिकारी व पटवारी से बिजली लाइन की लंबाई की नपती कराई गई। झील से नो कंस्ट्रक्शन जोन की नपती पटवारी से कराई गई। राजस्व निरीक्षक से लक्ष्मी विलास की भूमि के क्षेत्रफल संबंधी दस्तावेज तथा नक्शा प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि रियासत काल में निर्मित लक्ष्मी विलास होटल 29.30 एकड़ यानी 90 बीघा भूमि पर स्थित है।
डीएलसी रेट 285 करोड़ के बजाए 7.50 करोड़ में बेचा था होटल
सीबीआई ने 13 अगस्त 2014 को सू मोटो एफआईआर विनिवेश मंत्रालय के खिलाफ दर्ज की थी, जिसमें 12 वर्ष पूर्व की डीएलसी रेट 285 करोड़ के बजाए 7 करोड़ 50 लाख में होटल का बेचना पाया। पूर्व राज्यसभा सांसद ललित सूरी ने साढ़े 7 करोड़ में लक्ष्मीविलास भूमि तथा भवन सहित खरीदी थी। होटल खरीदने के लिए 15 बिडर्स ने टेण्डर डाले थे। 12 को डिस-क्वालिफाई कर दिया गया और दो ने टेंडर उठा लिए थे। संपत्ति मूल्यांकन के लिए मुंबई के कंसल्टेंट मैसर्स लेजार्ड इंडिया को आमंत्रित किया गया था। मूल्यांकन के लिए 70 पार्टियों ने टेंडर डाले थे मगर उनमें से किसी को कंसीडर नहीं किया गया।
होटल को निजी क्षेत्र में बेचने से पहले ये आधार तैयार किए
विनिवेश का विरोध कर रहे होटल के पूर्व सीनियर फ्रंट आॅफिस सुपरवाइजर अंबालाल नायक के मुताबिक विनिवेश मंत्रालय ने होटल को रेड जोन (नो कंस्ट्रक्शन जोन) बताकर निर्माण न करा पाने की वजह से घाटे में चलना बताया। विनिवेश से पूर्व 1997-98 की बैलेंस शीट में 1 करोड़ 10 लाख का लाभ बताया गया था वहीं 98-99 में 32 लाख का घाटा बता कर विनिवेश का आधार तैयार किया गया था। मंत्रालय की रिपोर्ट में होटल से बिजली की हाई टेंशन लाइन गुजरने का जिक्र किया गया जिसे शिफ्ट करना असंभव बताया गया।