उदयपुर। हिरणमगरी उपनगरीय क्षेत्र में नगर निगम के कई पार्क बदहाल हैं, वहीं दूसरी ओर उसी क्षेत्र में एेसे भी पार्क हैं जिनकी कॉलोनीवासियों के प्रयासों से तकदीर बदल गई है। इन्होंने न किसी की मदद का इंतजार किया और न ही निगम के भरोसे रहे। बस ईमानदार प्रयास और मेहनत के दम पर इनके बगीचों में हरियाली लहलहाने लगी हैं। इस बदलाव के बागबां प्रोफेसर से लेकर गृहणियां तक बनीं हैं। हरियाली के हीरो बने इन लोगों की कहानियाें से और शहरवासियों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रोफेसर ने 4 साल में कॉलेज की 4 बीघा में उगाए 5 हजार पौधे
चट्टानों पर खिलाए फूल
जमीन को खोदने पर पता चला कि तीन से चार इंच नीचे चट्टा ने हैं, लेकिन प्रोफेसर खान के इरादे कहां डगमगाने वाले थे। उन्होंने कुछ लेबर लगाकर पूरी जमीन खुदवाई। वहां पौधे लगाए और चट्टानों से निकले पत्थर से गार्डन के बीच रास्ते व क्यारियों की बाउंड्री बना दी।
सुखाडिय़ा युनिवर्सिटी में 4 बीघा जमीन जहां कभी झाड़ हुआ करते थे। यहीं के भूगोल विभाग के प्रोफेसर कायम अली खान ने 4 साल में यहां 5 हजार से अधिक पौधे लगाकर जमीन को गुलजार कर दिया है। प्रोफेसर खान बताते हैं उनकी माता पिता की स्मृति में परिवार कोई पुण्य कार्य करना चाहता था। खान ने अपनी कर्मस्थली में ही कुछ करने का सोचा। इस तरह दिसंबर 2010 में उन्होंने बंजर भूमि को गुलजार करने की ठानी। खान जहां भी जाते हैं वहां से कोई नया पौधा जरूर लाते हैं। वे केरल से लाए इंसुलिन प्लांट के बारे में बताते हैं कि इसकी पत्तियां डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी हैं। वे अलीगढ़ से साइकस लाए, यहां इसी साइकस से 200 पौधे बढ़ा लिए हैं। काजू, शिमला मिर्च, सफेद बैंगन, जेबी संतरा, रास्पबैरीज के साथ ही गुलाब की 15 वेरायटियां हैं। अप्रेल में पिता की बरसी पर वे सरकारी स्कूलों में पौधे बांटेंगे।
150 बच्चे आते श्रमदान करने, पत्नी लाती बच्चों के लिए खाना : प्रोफेसर खान ने बताया कि इस मुहिम से कॉलेज के करीब 150 बच्चे जुड़े हैं। सभी अलग अलग बैच में आकर श्रमदान करते रहते हैं। ऐसे में इनकी पत्नी बच्चों के लिए खाना बनाकर लाती हैं । बच्चों ने मिलकर सीमेंट से 5 कुंड बनाए हैं, जिसमें 6-7 रंगों की वाटर लिली व कमल के फूल हैं।