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दिल्ली से हमारी दिल्लगी, मोदी की चाय सी चर्चाएं उबलीं

6 वर्ष पहले
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उदयपुर. दिल्ली आप ने जीती। मोदी की चाय सी चर्चाएं उदयपुर में उबलीं। दिल्ली का मूड बदला। उदयपुर में दिल जले भी, दिल खिले भी। दिल्लगी ऐसे हुई कि गली-नुक्कड़, चौक-चौराहे, दफ्तर-घर सब जगह बस आप की दिल्ली ही दिल्ली।

बात की शुरुआत दिल्ली से विराम दिल्ली पर। हास में दिल्ली, परिहास में दिल्ली। जज्बात में दिल्ली। हर बात में दिल्ली। अरे क्या हुआ...निपटा दिया। अच्छा...ओ...ये कैसे हुआ।...ये तो होना ही था।...चलो अच्छा हुआ। जो भी था बस इन्हीं शब्दों के आगे-पीछे था सब कुछ। क्यों और कैसे पर घंटों बिता दिए। मोबाइल मानो मंगलवार को तो मोदी-बेदी और केजरीवाल के लिए ही था। वाट्सअप से लेकर फेसबुक तक। टीवी से लेकर सब्जी के ठेले तक सब कुछ दिल्ली-दिल्ली।
मफलरमैन सुपरमैन
सुविव कैंपस : एक ओर स्टूडेंट का ग्रुप मफलरमैन काे सुपरमैन बता रही थी, वहीं दूसरी ओर प्रोफेसर्स का ग्रुप चाय के साथ दिल्ली की चर्चा में लगा था। एक प्रोफेसर का कहना था कि केजरीवाल की जीत, मोदी की नहीं भाजपा की हार है। मोदी प्रोबेशन पीरियड में हैं, जिन्हें बहुत कुछ-समझना बाकी है।
बेलगामी पर लगेगा कंट्रोल
दोपहर 3 बजे कोर्ट परिसर की केंटीन में युवा वकीलों के बीच चर्चा। सुशील कोठारी, प्रवीण खंडेलवाल, कृष्ण सिंह चौहान, महेंद्र नागदा आदि मौजूद थे। कहना था कि दिल्ली के परिणाम से बेलगाम केंद्र सरकार और भाजपा पर कंट्रोल आएगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी।
आप छोड़ने वालों का क्या होगा
दोपहर 12.30 बजे चेतक सर्कल मुख्य डाकघर में अल्प बचत अभिकर्ता। हरीश नलवाया, दिनेश कुमावत, सुरेश अग्रवाल, ललित मेहता आदि। कहना था कि लोग छोड़कर गए, लेकिन केजरीवाल ने हिम्मत नहीं हारी तो बेहतर परिणाम मिले। मोदी के भाषण भी वैसे नहीं रहे।
जनता नहीं बख्शती, चाहे पीएम हो
दोपहर 1.30 बजे तांगा स्टैंड स्थित पान केबिन पर। राजेश तंबोली, मुकेश परिहार, अशोक पालीवाल, राजेंद्र खिंची आदि। कहना था कि समय के अनुसार जनता बदलाव और तुरंत परिणाम चाहती है। भाजपा-कांग्रेस के दिग्गज हो या प्रधानमंत्री मोदी ही क्यों न हो।