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ऑक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी, मरीजों काे खतरा, 3 से 4 घंटे में ही खत्म हो रहा सिलेंडर

6 वर्ष पहले
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उदयपुर. आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबी, जनाना और बाल चिकित्सालय की आईसीयू में पिछले दो माह से सिलेंडरों में ऑक्सीजन गैस कम आ रही है। यह सिलेंडर गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए काम में आते हैं। इस अनियमितता से अस्पताल प्रशासन को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, मरीजों की जान भी खतरे में आ सकती है। समय पर सिलेंडर न बदला जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है।

औसतन एक सिलेंडर 5 से 6 घंटे तक मरीज को ऑक्सीजन देता है, लेकिन पिछले दिनों से यह 3 से 4 घंटे में खत्म होने लगा। इसी से मेडिकल स्टाफ को सप्लायर की यह गड़बड़ी पकड़ में आई।
दरअसल सिलेंडरों की सप्लाई शहर की ही एक फर्म से होती है। सबसे ज्यादा शिकायतें बाल चिकित्सालय से आई हैं। इसकी शिकायत अधीक्षक काे भी की गई है। अब तक एमबी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। एक बार बैठक जरूर की। कुछ दिन सप्लाई ठीक भी रही। स्टाफ ने इस अनियमितता को मरीजों के लिए खतरा बताया है।
स्टाफ भी हो रहा है परेशान
सिलेंडरों मेें गैस कम होने से स्टाफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिलेंडर बार-बार बदलना पड़ता है। कई बार तो आधी रात को स्टोर खुलवाना पड़ता है। अधीक्षक को शिकायतें भी लिखकर दी गई हैं। स्टाफ अब मीटर लगाकर गैस मापने पर विचार कर रहा है।
ठोस कार्रवाई करेंगे
लिखित में शिकायतें मिली हैं। मेरे अधीक्षक रहते भी शिकायतें आई थीं। बैठक कर हमने सप्लायर को नोटिस दिया है। अब भी शिकायतें हैं तो अधीक्षकों से बात की जाएगी। उनको ठोस कार्रवाई के लिए कहा जाएगा। -डॉ. डीपी सिंह, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज
कम गैस की जानकारी नहीं
मैं अभी बाहर हूं। आक्सीजन सिलेंडरों में कम आपूर्ति के लेकर मुझे कोई नोटिस नहीं मिला। न ही इसकी कोई मुझे जानकारी है। पता करके ही बता सकता हूं।
संजय बूंब, सप्लायर
कहां क्या हो रही है अनियमितता
सात क्यूबिक आनी चाहिए प्रति सिलेंडर
अस्पताल में सप्लाई किए जाने वाले सिलेंडर में 7 क्यूबिक गैस आनी चाहिए। इसमें 10 से 15 फीसदी की अनियमितता हो रही है।
रोजाना 125 गैस सिलेंडर, 2 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च
अस्पताल में रोजाना 125 सिलेंडर सप्लाई होते हैं। एक सिलेंडर पर 7 रुपए 52 पैसे कीमत आती है। महीने पर इसका खर्च 2 लाख रुपए बनता है। इस अनियमितता से सप्लायर काफी पैसा बचा रहा है।