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डाउनलोड करेंउदयपुर. जिले में लॉ एंड ऑर्डर के हालात जानने के लिए अब ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। जमीन से 200 फीट तक की ऊंचाई पर जाकर ड्रोन पर लगे कैमरे से संबंधित क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों को कलेक्टर व एसपी अपने आईपैड पर लाइव देख सकेंगे।
सांप्रदायिक हिंसा, आंदोलन, प्रदर्शनकारियों द्वारा तोडफ़ोड़ जैसी घटनाओं, जमीनों व पहाड़ों पर कब्जा करने वालों पर इसके माध्यम से नजर रखी जा सकेगी। अमेरिका द्वारा आतंकवादी ठिकानों पर किए जाने वाले ड्रोन के मुकाबले यह छोटा रूप होगा। लॉ एंड ऑर्डर के रूप में ड्रोन का उपयोग पहली बार लेकसिटी में किया जाएगा। इसकी कीमत 40 से 45 हजार रुपए बताई गई है।
यूआईटी ने खरीदा ड्रोन
नगर विकास प्रन्यास ने अमेरिका में निर्मित ड्रोन दिल्ली से खरीदने का ऑर्डर दे दिया है। इसका पूरा नाम पेरट एआर ड्रोन क्वाड्रिकॉप्टर है। इसका दायरा 200 फीट तक का ही है। इसकी सफलता के बाद वायरलैस ड्रोन खरीदने पर विचार किया जाएगा।
हर हलचल की देगा जानकारी
लॉ एंड ऑर्डर
जिले में किसी भी क्षेत्र में कानून व्यवस्था बिगडऩे पर प्रदर्शनकारियों, तोडफ़ोड़, पथराव करने वालों पर नजर रखी जा सकेगी। कैमरे में कैद होने के बाद ऐसे लोगों को पकडऩे में आसानी होगी।
अवैध कब्जे
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पहाड़ों, नदियों व तालाबों के आसपास अवैध कब्जा करने वालों पर भी दूर से भी नजर रखी जाएगी। ऐसे क्षेत्रों को आसानी से कैमरे में कैद किया जा सकेगा।
आपदा के समय
ज्यादा बारिश होने, अकाल पडऩे, भूकंप जैसी आपदा के समय दूर दराज के क्षेत्रों में प्रभावित लोगों और उन्हें बचाने के लिए ड्रोन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। हाइवे पर ट्रैफिक जाम की स्थिति को जानने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
ऐसे होता है संचालन
ड्रोन का आकार छोटे हेलिकॉप्टर (खिलौना) जैसे होता है। इस पर दो कैमरे लगे होते हैं।
सॉफ्टवेयर के माध्यम से ड्रोन उपकरण को आईपैड, आईफोन से जोड़ा जाता है। इसके लिए अलग से कंट्रोल रूम बनाया जाता है जो पायलेटिंग स्टेशन कहलाता है।
आईपैड या आईफोन के जरिये इसको हवा में उड़ाया जाता है जो अधिकतम 200 फीट तक की ऊंचाई पर जा सकता है।
आईपैड के माध्यम से ही इसको आगे-पीछे या ऊपर-नीचे और चारों दिशाओं में घुमाया जा सकता है।
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