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कोटड़ा के आवासीय विद्यालय में पांच साल से पढ़ा रहा है चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

8 वर्ष पहले
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कोटड़ा (उदयपुर)। न तो अधिकारिक तौर पर शिक्षक का दर्जा हासिल है न ही उतना वेतन। फिर भी एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पांच साल से तीन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ा रहा है। 18 के मुकाबले मात्र 2 अध्यापक वाले इस स्कूल में इस कर्मचारी ने अपनी मूल जिम्मेदारी के साथ ही बच्चों का भविष्य संवारने का भी बीड़ा उठा रखा है।

शिक्षा की यह अलख जग रही है उदयपुर मार्ग स्थित जनजाति आवासीय विद्यालय में। विश्राम डामोर नाम का यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कक्षा छह, सात, आठ में गणित व अंग्रेजी की नियमित कक्षाएं लेता है। इसके साथ ही स्कूल की सफाई, पीरियड लगाना, शिक्षकों के निर्देशों की पालना में भी कोताही नहीं बरतते। 250 बच्चों के नामांकन वाले इस विद्यालय में सालों से अध्यापक के अधिकतर पद रिक्त हैं। डामोर ने 12वीं तक ही पढ़ाई की है।

इसके बावजूद लगन ऐसी लगी कि खुद किताबें पढ़-पढ़कर बच्चों को ज्ञान बांटने लगे। उप-प्रधानाचार्य अशोक पुरोहित के मुताबिक इस निस्वार्थ सेवा को लेकर विद्यार्थी और शिक्षक भी इस कार्य से काफी खुश हैं। उल्लेखनीय है कि रिक्त पद भरने की मांग पर हाल ही में बच्चों ने हॉस्टल से बाहर आकर उदयपुर मार्ग पर जाम लगा दिया था।

पद तो हैं, लेकिन शिक्षक नहीं

प्रधानाचार्य का पद लंबे समय से रिक्त है। अंग्रेजी, हिंदी, हिंदी साहित्य, अर्थशास्त्र, विज्ञान, राजनीति विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित सहित सभी आठ व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं। स्वीकृत 9 वरिष्ठ अध्यापकों के पद में से 7 रिक्त हैं। वार्डन, शारीरिक शिक्षक, लाइब्रेरियन, प्रयोगशाला प्रभारी सहित कार्यालय से जुड़े अन्य कर्मचारियों के पद भी लंबे समय से रिक्त हैं। कुछ विद्यार्थी मित्र जरूर लगे हैं, लेकिन वे भी नाकाफी हैं।