अवैध वाटिकाओं में समारोह हुए तो पुलिस करेगी कार्रवाई

9 वर्ष पहले
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उदयपुर।


शहर के अवैध रूप से संचालित वाटिकाओं की सूची संबंधित थानों में भी रहेगी। नगर परिषद ऐसी सूची पुलिस और प्रशासन को देगी। इन वाटिकाओं में जब भी किसी समारोह से क्षेत्र के लोगों को परेशानी होगी, पुलिस संचालक के खिलाफ कार्रवाई करेगी।


दैनिक भास्कर ने बुधवार के अंक में 'रिहायशी इलाके में रोज बैंड-बाजे की चिल्ल-पोंÓ शीर्षक से खबर के जरिए आमजन की परेशानी ओर जिम्मेदारों का ध्यान खींचा था। इसी दिन परिषद आयुक्त सत्यनारायण आचार्य ने राजस्व शाखा को इस मामले में निर्देश जारी कर दिए। राजस्व निरीक्षक को पाबंद किया गया है कि वाटिका पंजीयन को लेकर जो भी आवेदन आए हैं, उनका नौ फरवरी तक हर हाल में निस्तारण कर लिया जाए। जिन वाटिकाओं का पंजीयन नहीं किया जा सकता, उनके आवेदन निरस्त कर दिए जाएं। पंजीकृत वाटिकाओं और अवैध वाटिकाओं की लिस्ट तैयार कर कलेक्टर, एसपी व संबंधित थाना पुलिस को दे दी जाएगी। पुलिस और प्रशासन से भी कहा जाएगा कि ऐसी वाटिकाओं में कार्यक्रम नहीं होने दें। अवैध वाटिकाओं पर परिषद की नजर रहेगी।

मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत

वाटिका संचालकों द्वारा नियमों का पालन नहीं करने और नगर परिषद द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं करने पर प्रभावित लोगों ने मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी है। सुभाषनगर निवासी राहुल व्यास ने बताया कि वाटिका संचालकों की मनमर्जी और परिषद की अनदेखी के चलते वाटिकाओं के आसपास रहने वालों को जीना दुश्वार हो गया है। मुख्यमंत्री को बताया गया है कि जिन वाटिकाओं का पंजीयन निरस्त हो चुका है, वहां भी बिना रोक-टोक के आयोजन हो रहे हैं। यह सब परिषद की मिलीभगत से हो रहा है।


आयुक्त ने नए सिरे से सुनवाई की तैयारी की

सुभाष नगर स्थित गट्टानी व टाया ग्रुप की वाटिकाओं के पंजीयन आवेदन निरस्त करने के मामले में नगर परिषद आयुक्त ने नए सिरे से सुनवाई की तैयारी शुरू कर दी है। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक ने इस मामले में दायर अपील पर सुनवाई करते हुए परिषद आयुक्त को नए सिरे से सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए एक माह का समय दिया गया है। आयुक्त सत्यनारायण आचार्य ने बताया कि इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। आयुक्त ने बताया कि मामले की सुनवाई आगामी 21 जनवरी को होगी। गौरतलब है कि इन वाटिकाओं के पंजीयन को लेकर हाल ही में नगर परिषद ने दो अलग-अलग निर्णय लिए थे। सभापति की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इन वाटिकाओं का पंजीयन करने के निर्देश दिए, लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं किया। दूसरे फैसले में परिषद आयुक्त व बोर्ड ने आवेदन निरस्त कर दिया था। इसको लेकर परिषद में राजनीति भी खूब गरमाई थी।