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डाउनलोड करेंमावली. डबोक स्थित संत आसाराम आश्रम में सरकारी बिला नाम जमीन से कब्जा हटाने के लिए कोर्ट से आदेश हो चुके हैं। आश्रम संचालकों ने खुद की खातेदारी के अलावा दो बीघा 18 बिस्वा सरकारी बिला नाम जमीन पर कब्जा कर रखा है। इस संबंध में पिछले दिनों तहसीलदार सुरेंद्रसिंह राठौड़ की अदालत ने सरकारी जमीन से आश्रम का कब्जा हटाने का आदेश जारी किया है। इसे लेकर नांदवेल पंचायत ने कब्जा हटाने की तैयारी कर ली है। पंचायत की पांच फरवरी को होने वाली कोरम बैठक में तारीख निर्धारित कर कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
आसाराम आश्रम में संचालकों ने 2 बीघा 18 बिस्वा सरकारी बिला नाम जमीन पर कब्जा कर पक्का निर्माण कर रखा है। कब्जे वाली यह सरकारी जमीन आश्रम के एक तरफ बनी हुई है, जिसके एक ओर चारदीवारी बना रखी है। आश्रम के स्वामित्व में 34 बीघा जमीन है, लेकिन संचालकों ने पास वाली सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर लिया था। आसाराम के दुराचार मामलों में फंसने के बाद करीब तीन महीने पहले उच्चाधिकारियों ने देशभर में आसाराम आश्रमों में जमीनों का सीमांकन करने के आदेश दिए थे।
प्रकरण सामने आने पर नांदवेल पंचायत ने भी सरकारी जमीन पर आश्रम के कब्जे को लेकर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई कराने की मांग की थी। इस पर तहसील प्रशासन ने जमीन का सीमांकन करवाया था। सीमांकन के दौरान आश्रम में सरकारी जमीन पर कब्जा साबित हुआ था। इस पर तहसीलदार की कोर्ट में 90 बी के तहत प्रकरण दर्ज किया था। प्रकरण दर्ज होने पर बचाव पक्ष की ओर से कब्जे के संबंध में कुछ दिन की मोहलत भी मांगी थी। प्रकरण पर फैसले में पिछले दिनों तहसीलदार की कोर्ट ने आश्रम में सरकारी जमीन का कब्जा हटाने के आदेश दिए थे।
पंचायत ने की तैयारी
आश्रम में सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई पंचायत व प्रशासन के साझे में की जाएगी। इसके लिए 21 जनवरी को नांदवेल पंचायत की कोरम बैठक में कब्जा हटाने की कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है। सरपंच बंजारा ने बताया कि 5 फरवरी को होने वाली कोरम बैठक में कब्जा हटाने का प्रस्ताव व तिथि तय कर प्रशासन के सहयोग से कब्जा हटा दिया जाएगा। इधर, आश्रम को जमीन दान करने वाले दानदाता ने भी पिछले दिनों जमीन का सामाजिक व धार्मिक कार्यों में उपयोग नहीं होने का आरोप लगाते हुए जमीन का दानपत्र. निरस्त कराने के लिए उदयपुर की कोर्ट में वाद दायर किया था।
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