उदयपुर। राजस्थान भाजपा के सह प्रभारी किरीट सोमैया ने नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल पर 200 करोड़ के जमीन घोटाले का आरोप लगाया है।
सोमैया ने कहा कि अब देखने वाली बात यह होगी कि धारीवाल इस्तीफा कब देते हैं? सोमैया ने सोमवार को यहां पटेल सर्कल स्थित पार्टी कार्यालय पर पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्रीय मंत्री पवन बंसल व अश्विनी कुमार के इस्तीफे के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनके मंत्री शांति धारीवाल का नंबर है। खान आवंटन घोटाले के बाद यह दूसरा घोटाला उजागर हुआ है।.
सोमैया ने कहा कि जयपुर के ग्राम टोडी रमजानीपुरा में मैसर्स गणपति कंस्ट्रक्शन को गलत ढंग से 24086.42 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई। भाजपा सरकार के कार्यकाल में जेडीए के प्रस्ताव को वर्ष 2005 में सरकार ने स्वीकृत योग्य नहीं मानकर निरस्त कर दिया।
उसी मामले की पत्रावली को नगरीय विकास विभाग ने विभाग के पास उपलब्ध नहीं होना बताकर और भाजपा सरकार के आदेश को छिपाकर वर्तमान सरकार के बनने के बाद वर्ष 2011 में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के अनुमोदन करने पर 2012 में जेडीए ने पट्टा जारी कर दिया। इस पट्टे को निरस्त करने के लिए मंजु गर्ग ने सरकार को शिकायत की,लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
लेकिन जब उन्होंने (सोमैया) 8 मई को इस मामले में एसीडी में शिकायत दर्ज करवाई तो आनन फानन में गणपति कंस्ट्रक्शन के नाम जारी आवंटन निरस्त कर दिया गया। सोमैया ने कहा कि जिस गणपति कंस्ट्रक्शन को धारीवाल ने जमीन आवंटन करने के आदेश दिए उसी आवंटन को निरस्त करने धारीवाल को नया आदेश जारी करना पड़ा है। यह जमीन घोटाला ही है। राज्यपाल से भेंट कर मांग की जाएगी कि इस प्रकरण की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से करवाई जाए। सोमैया ने कहा कि उनके आरोप गलत हैं तो वे तिहाड़ जेल जाने तैयार हैं।
वैभव गहलोत पर भी साधा निशाना क्च सोमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत व ट्राइटन कंपनी के रत्न कांत शर्मा के बीच कारोबारी संबंध हैं। इस कंपनी के होटल फेयर माउंटेन के 100 रुपए के शेयर मॉरीशस की बेनामी कंपनी शिवनेर होल्डिंग ने 40 हजार रुपए के हिसाब से खरीदे। यह काला धन है जिसे शेयर के नाम पर सफेद किया गया। इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए। सोमैया ने दावा किया कि गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद रत्न कांत राजस्थान में सक्रिय हुआ है। रत्न कांत का उदयपुर में भी ट्राइगोन रिसोर्ट बनने जा रहा है।
खुद को बचाने के लिए अधिकारी पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश
सोमैया ने आरोप लगाया कि इस मामले में धारीवाल फंसते हैं। मुख्यमंत्री गहलोत के कहने पर धारीवाल ने जमीन आवंटित की। दोनों को बचाने के लिए झूठ का सहारा लिया जा रहा है, और खुद को बचाने के लिए जेडीए के अधिकारी पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश की जा रही है। सोमैया ने इस मामले की जांच जेडीए के सचिव को सौंपने पर भी सवाल खड़ा किया।