उदयपुर। अच्छा किया तो आपके पास अच्छा ही लौटकर आएगा। घर में मां या पत्नी ने अच्छा खाना बनाया हो, पिता ने कोई अच्छी चीज लाकर दी हो, ऑफिस में किसी साथी ने अच्छा काम किया हो या किसी दोस्त ने किसी की मदद की हो। छोटे-छोटे अच्छे काम की भी तारीफ कीजिए, मुस्कुराकर थैंक्यू बोलिए और एप्रिशिएट (प्रशंसा) कीजिए। निश्चित ही उसका फायदा मिलेगा।
यह बात प्रसिद्ध मैनेजमेंट गुरु एन. रघुरामन ने कही। वे बुधवार शाम सुखाड़िया यूनिवर्सिटी सभागार में दैनिक भास्कर व पेसिफिक यूनिवर्सिटी की ओर से मोटिवेशनल सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने ‘औसत जीवन को असाधारण जीवन कैसे बनाएं’ विषय पर उद्बोधन दिया।
सीधी और सरल भाषा के साथ उन्होंने जिंदगी को असाधारण बनाने के कई आसान नुस्खे बताए। अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने फर्श से अर्श तक पहुंचने वाले लोगों और उनके संघर्ष के उदाहरण भी दिए। मैनेजमेंट गुरु को सुनने के लिए युवाओं में विशेष उत्साह दिखा। श्रोताओं में उनकी संख्या ज्यादा थी।
आयोजन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। एन. रघुरमन, सनराइज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के हरीश राजानी, सोजतिया क्लासेज के महेंद्र सोजतिया और दैनिक भास्कर के यूनिट हेड अजीत वी. जॉनी ने दीप प्रज्ज्वलन किया। आयोजन में नारायण सेवा संस्थान के प्रशांत अग्रवाल, अरावली हॉस्पिटल के डॉ. आनंद गुप्ता, आरएसएमएम के सीपीए बालमुकुंद असावा, एमएलएसयू के रजिस्ट्रार एल.एन. मंत्री, रेलवे से एआरओ हरफूल चौधरी आदि मौजूद थे।
टिप्स, जो जरूरी हैं जिंदगी के लिए
असंभव कुछ भी नहीं
जीवन में असंभव कुछ भी नहीं है, कोशिश करें तो सब कुछ संभव है। काम के प्रति जिद करेंगे तो बदलाव होगा ही। मुश्किल काम को पूरा करने के लिए प्लानिंग करें और उस काम को चरणबद्ध तरीके से करें। ऐसा करने पर काम आसान होता नजर आएगा। इम्पॉसिबल की स्पेलिंग को भी ध्यान से देखेंगे तो वह भी बताती है कि ‘आई-एम-पॉसिबल’।
बिना जाने नहीं बनाएं धारणा
किसी व्यक्ति या किसी काम के प्रति धारणा नहीं बनाएं, जब तक उसके बारे में जान न लें। बिना जाने धारणा बनाने से उस व्यक्ति या काम से हमेशा दूरी बनी रहती है। काम में सफलता नहीं मिलती।अपनी सोच का नजरिया बदलने की जरूरत है।
टैलेंट कभी नहीं रुकता
अपनी प्रतिभा को पहचान कर जिस दिशा में काम करना है, उसी दिशा में अभ्यास कीजिए। पुराने जमाने की नौकरियों का समय जा रहा है, नई तरह की नौकरियां, प्रोफेशन शुरू हो गए हैं। कुछ नया नहीं करने पर बेहतर परिणाम मिलना मुश्किल है। समय की कीमत को समझते हुए कुछ ऐसा दें कि लोगों की समझ में जल्दी आ सके।
जितना समय देंगे उतना बेस्ट
किसी भी काम को जितना समय देंगे, उतना ही अच्छा नतीजा मिलेगा। काम किसी भी तरह का हो, बेहतर परिणाम तब ही मिल सकते हैं, जब उसे ज्यादा से ज्यादा समय दिया जाए। सोच और नजरिया बदलें, जो काम जब करना है, तब ही करें। इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि ऑफिस और घर को जितना समय देना चाहिए, उतना दें।
एकाग्रचित रहें
मैनेजमेंट गुरु ने कहा कि ज्यादातर लोग एक काम को करते हुए दूसरे काम में ध्यान देते हैं। काम को लेकर अधिकांश मीटिंग्स भी ऐसी ही होती हैं। जो काम किया जा रहा है, उसी में एकाग्रचित रहें तो परिणाम बेहतर मिलेंगे। अपना ध्यान मूल काम से हटने नहीं दें, चाहे वह पढ़ाई हो या कॅरियर। साइरस मिस्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि वे 80 कंपनियों का काम संभालते हैं।
दुनिया के सफल लोगों की कहानी
एन. रघुरामन ने कई सफल लोगों के संघर्ष, मेहनत और सफलता की कहानी भी साझा की। उन्होंने जमीन से उठकर आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाले लोगों की कहानियां भी बताई। इनमें लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर, अमिताभ बच्चन जैसे नाम शामिल थे।
सवालों के जवाब पाकर खिले चेहरे
सेमिनार का समापन लोगों के सवाल से हुआ। जवाबों में मैनेजमेंट गुरु ने कहा कि हर काम में एक्सपर्ट नहीं हो सकते, लेकिन जो कर सकते हैं, उसमें एक्सपर्ट होना चाहिए। अपना टैलेंट पहचानने के लिए सोचिए, लेकिन खुद को बेवकूफ मत बनाइए। विश्वास रखना जरूरी है, लेकिन अति उत्साही होना ठीक नहीं।