उदयपुर। सोलहवीं सदी के पूर्वार्ध तक अरावली की वीरान सी वादियां उत्तरार्ध आते-आते भव्य नगर की तरह विकसित होने लगी। गिरनार के रास्ते के कारण गिर्वा कहे जाने वाले इस इलाके में महाराणा उदयसिंह ने 16वीं सदी में उदयपुर नगर की नींव रखी। एक संन्यासी के कहने पर गिर्वा की गांठ पर महाराणा ने मंडन के प्रपौत्र शिल्पी को साथ लेकर शुरुआती निर्माण करवाए।
अक्षांश रेखाओं के समांतर और जल विभाजक संधी को ध्यान में रखकर स्थापना की गई। पीछोला झील के किनारे महलों का निर्माण हुआ। मेवाड़ की राजधानी का स्वरूप देने के लिए इस नगर को देबारी से लेकर कई घेरों की सुरक्षा दी गई। इसके अलावा पोलों और परिखाओं (छिपी हुई नहरें) की कल्पना की गई। तब यहां गिर्वा का तालाब हुआ करता था। पास में छोटा सा पीछोली गांव था, जहां थोड़ी बहुत आबादी थी।
आबादी बढ़ाने के लिए आसपास के गांवों से लोगों को जागीर देखकर बसाया गया। इसका प्रमाण ताम्रपत्र और शिलालेख में है। नगर को विकसित होने में 55 साल लगे और फिर 1615 के आसपास इसे मेवाड़ राज्य की राजधानी घोषित किया गया। नगर विकास में महाराणा प्रताप और अमर सिंह का भी बड़ा योगदान रहा। आजादी के बाद नगर का विकास तीव्र गति से होने लगा और परकोटे से बाहर आकर यह शहर चारों दिशाओं में फैलता गया। आज शहर में ऊंची-ऊंची अट्टालिकाएं हैं। मॉल और मल्टीप्लेक्स और विकसित बाजार हैं।
(जैसा कि इतिहासविद डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने बताया)
63 करोड़ रुपए की है योजना
नगर निगम और हिंदुस्तान जिंक के सहयोग से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का कार्य इसी साल पूरा होगा। 63 करोड़ की इस योजना के लिए हिंदुस्तान जिंक की तरफ से एकलिंगपुरा में एसटीपी स्थापित किया जा रहा है। इधर, नगर निगम ने सीवरेज लाइन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिए हैं। आयड़ नदी में गंदे पानी का बहाव बंद होगा।
सुखाड़िया चेयर का लाभ इसी साल से
सुखाड़िया में स्थापित सुखाड़िया चेयर का लाभ शोधार्थियों एवं अन्य को इस साल से मिलने लगेगा। संभाग के सभी कॉलेजों को एक कॉमन सर्वर से जोड़ा जाएगा। यह शोधार्थियों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा। सुखाड़िया चेयर में विभिन्न शोध साहित्यों को ऑनलाइन किया जाएगा तथा प्रस्तावित शोध कार्यो में शोधार्थियों से सहयोग भी लिया जाएगा। चेयर से जुड़ी संबंधित तैयारियां प्रक्रियाधीन हैं।
दुनिया में उदयपुर की खूबसूरती को प्रचारित कर रहे हैं युवा
शहर के युवा उदयपुर की खूबसूरती का दुनियाभर में प्रचार कर रहे हैं। माय सिटी माय एंगल चैनल के माध्यम से इंजीनियरिंग छात्र यश शर्मा ने वीडियो के माध्यम से शहर का प्रचार किया है। इतिहास, तीज त्योहार व यहां होने वाले कार्यक्रम के वीडियो भी इस चैनल पर उपलब्ध हैं। 2011 में शुरू हुए इस चैनल को अब तक विश्वभर में 54 लाख से अधिक लोग देख चुके है। यश शर्मा यह काम निशुल्क कर रहे हैं।
इसके लिए उन्हें जिला स्तर पर भी सम्मानित भी किया जा चुका है। इसमें उदयपुर के सभी ऐतिहासिक स्थलों के फोटो व जानकारी, झीलों और मनाए जाने वाले सभी तीज और त्योहार की जानकारी भी उपलब्ध है। यश का कहना है कि उदयपुर में रहने वाले लोग इस चैनल को कम देखते हैं लेकिन विदेशों में रहने वाले उदयपुर के लोग इस चैनल के माध्यम से उदयपुर से जुड़े रहते हैं।
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