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अब एसएमएस आएगा, कृषि भूमि का नामांतरण हो गया है, ले जाइए

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. कृषि भूमि के नामांतरण के लिए लोगों को चक्कर नहीं काटने पड़े इसके लिए सरकार ने नई व्यवस्था की है। प्रक्रिया पूरी होते ही आपके मोबाइल पर एसएमएस आ जाएगा कि तहसील कार्यालय आकर नामांतरण ले जाइए। सहमति से बंटवारे वाली जमीन के नामांतरण के लिए सबसे पहले नजदीक के ई मित्र या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर अप्लाई कर दस्तावेज जमा कराने होंगे। प्रक्रिया शुरू होते ही एसएमएस से अपडेट मिलता रहेगा। संभागीय आयुक्त वैभव गालरिया ने सरकार के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि इसके पीछे सरकारी मंशा यह है कि बंटवारे की कृषि भूमि नामांतरण के लिए आमजन को चक्कर नहीं काटने पड़े।
खेरवाड़ा में हालात देख सरकार का नया विजन
सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत उदयपुर दौरे में सीएम वसुंधरा राजे को कृषि भूमि के नामांतरण को लेकर कई शिकायतें मिली थी। खेरवाड़ा में मंच पर आते ही सीएम, पटवारियों की कार्यशैली पर बरस पड़ी थीं। कुछ केस में तो मौत के कई साल बाद तक नामांतरण नहीं हुए थे।

एडीएम नोडल ऑफिसर, ट्रेंड करेंगे पटवारियों को
नई व्यवस्था के तहत आवेदकों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए पटवारियों को ऑनलाइन वर्किंग की ट्रेनिंग भी दी जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एडीएम को नोडल अफसर बनाया जाएगा और वे प्रक्रिया पूरी होने तक मॉनिटरिंग करेंगे।
जानिए, आवेदन से लेकर नामांतरण तक कैसे चलेगी पूरी प्रक्रिया
>ई मित्र या सीएससी पर अप्लाई कर दस्तावेज जमा कराने होंगे। मोबाइल नंबर भी देने होंगे।
>तहसील में इन दस्तावेजों का वेरीफिकेशन होगा।
>इसके बाद ऑनलाइन दस्तावेज तहसीलदार के पास पहुंचेंगे।
>वहां से आवेदक को पहला एसएमएस आएगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर होगा।
>तहसीलदार पटवारी को दस्तावेज की जांच व मौके पर भेजेगा। एसएमएस भी आएगा।
>जांच के बाद एसएमएस आएगा कि तहसील में कब उपस्थित होना है।
>तहसील में एक और जांच के बाद जमीन का नामांतरण होगा। राजस्व रिकॉर्ड में इसका इंद्राज किया जाएगा।
>नामांतरण के बाद मैसेज आएगा कि आपकी जमीन का नामांतरण हो गया है, आकर ले जाइए।