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साढ़े तीन साल बाद जमीनों की रिजर्व प्राइस 30% तक बढ़ाई

6 वर्ष पहले
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उदयपुर. नगर निगम सीमा में जमीनों की आरक्षित दर (रिजर्व प्राइस) साढ़े तीन साल बाद 30 फीसदी तक बढ़ा दी गई हैं। प्रस्ताव मंजूरी के साथ प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इससे लीज व नियमन राशि भी महंगी हो जाएगी।

नई आरक्षित दरें आवासीय, वाणिज्यिक, आबादी, गैर योजना और कच्ची बस्ती क्षेत्रों में दर अलग-अलग रहेगी। इस संबंधमें मेयर चंद्रसिंह कोठारी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक हुई थी। इस बैठक में आरक्षित दरें तय की गईं। इससे पहले निगम ने 29 जून 2011 में आरक्षित दर में बढ़ोतरी की थी। नगर निगम के इन प्रावधानों का सबसे ज्यादा असर सरकार से आरक्षित दर पर जमीन आबंटन पाने वालों, बिना स्वीकृति निर्माण करने के बाद नियमन करवाने वालों पर पड़ेगा।
जमीनों की दरें बढ़ने का हम पर क्या असर
लीज राशि : जिन्हें सरकारी एजेंसी से अारक्षित दर पर अब प्लाट आवंटित होगा।
नियमन राशि : जिन्होंने स्वीकृति विपरीत, बिना सेटबैक छोड़े या बिना स्वीकृति निर्माण कराया है।
पैनल्टी : आबंटित प्लांट पर समय पर निर्माण नहीं करने पर पैनल्टी वसूल की जाएगी। चाहे आवंटन पहले कभी भी हुआ हो। उन पर भी बढ़ी दर से पैनल्टी लगेगी, जिन्होंने आवंटित प्लाट समय से पहले बेच दिया हो। ऐसे मामले में खरीददार को पैनल्टी चुकानी होगी।
ऐसे होगी लीज और नियमन की वसूली
नियमन - उदाहरण के तौर पर किसी क्षेत्र की पहले आवासीय आरक्षित दर 390 रुपए थी। किसी ने अपने प्लॉट में 500 वर्ग फीट एरिया में स्वीकृति विपरीत या बिना स्वीकृति निर्माण कर लिया है तो उसकी नियमन राशि पहले 195000 रुपए बनती थी जो अब नई दर 780 के आधार पर 390000 रुपए बनेगी।
लीज राशि - उदाहरण के तौर पर पहले सरकारी एजेंसी से 1000 वर्ग फीट का प्लाट आबंटन हुआ है तो वहां की पुरानी आवासीय आरक्षित दर 390 रुपए होने से कुल राशि 390000 रुपए बनती थी। इसके ढ़ाई प्रतिशत के हिसाब से लीज राशि सालाना 8700 रुपए बनती थी। अब उसी क्षेत्र की आरक्षित दर 510 रुपए होने से सालाना 12500 रुपए जमा करवाने होंगे।