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जेल में गैंग बनाई, ट्रक चुरा कर तस्करों को बेच दिए

8 वर्ष पहले
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उदयपुर. ट्रक चोर गैंग के खुलासे के साथ ही एक बार फिर जेल में बंद कैदी के वहीं से गैंग ऑपरेट करने की बात सामने आई है। चोरी के बाद आरोपी जेल में बंद अपराधियों से संपर्क कर तस्करों को ओने-पौने दाम में ट्रक बेच रहे हैं। बुधवार को सूरजपोल थाना पुलिस द्वारा पकड़े गए गिरोह से पूछताछ में यह खुलासा हुआ। पुलिस अब मामले की तफ्तीश में जुट गई है।

एसपी अजयपाल लांबा ने बताया कि पुलिस ने गिरोह में शामिल दीवानशाह कॉलोनी निवासी अंसार उर्फ सोनू पुत्र हरदिल अजीज, स्वराजनगर निवासी इकराम उर्फ अकरम पुत्र रशीद मोहम्मद को गिरफ्तार किया है। दीवानशाह कॉलोनी निवासी मुराद पुत्र आबिद शाह फरार है। उसकी तलाश की जा रही है। आरोपियों से 21 जनवरी को चोरी किया ट्रक बरामद कर लिया गया है। मुखबिर से सूचना मिली थी कि 21 जनवरी को रेलवे स्टेशन के पास से चोरी हुआ ट्रक चित्रकूट नगर के पीछे डीपीएस से सटे जंगल में वीरान जगह पड़ा है। आरोपी उसे निकालकर बेचने की फिराक में हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने सुखेर हाईवे पर नाकाबंदी की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। कार्रवाई डीएसपी गोवर्धनलाल खटीक के नेतृत्व में थानाधिकारी बोराज सिंह भाटी, एएसआई अभयनाथ चौहान, कांस्टेबल मो. अतहर, फतह सिंह, मुकेश कुमार, मनबहादुर, गणेश सिंह, गोविंद सिंह की टीम ने की।

ऐसे शुरू किया गोरखधंधा

सोनू सूरजपोल थाने का हिस्ट्रीशीटर है। तीनों आरोपियों की जेल में मुलाकात हुई। ये जेल में ही अपराधी कासम के संपर्क में आए। कासम ने कहा-बाहर जाकर ट्रक चोरी करो तो डीलिंग करवा दूंगा। इस पर तीनों ने गैंग बनाई और बाहर आकर ट्रक चुराना शुरू कर दिया। ट्रक चोरी कर जेल में कासम से फोन पर संपर्क किया। कासम तस्करों से बात कर ट्रक पहुंचाने की जगह आरोपियों को बताता था। आरोपी बताई जगह पर ट्रक छोड़ते, तस्कर के गुर्गे आकर 5 से दस हजार रुपए देते और ट्रक ले जाते थे। इस तरह आरोपियों ने दो ट्रक बेच दिए थे। गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ लूट, चोरी, जानलेवा हमला करने, एनडीपीएस एक्ट, आम्र्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। कासम पिछले साल जयपुर से पकड़े गए चोरी के वाहन गिरोह, नकली सोने की ईंट से ठगी करने सहित कई मामलों में नामजद है।


रतलाम हाईवे पर तस्करों की मंडी : पुलिस ने बताया कि रतलाम से नसीराबाद के बीच खाली मंडी है। वहां के प्रशासन के उपयोग में नहीं लेने पर अब इसे अपराधी उपयोग कर रहे हैं। इस मंडी में आरोपी चोरी की गाड़ी खड़ी कर देते हैं। तस्कर के गुर्गे आकर इसे लेते हैं और चोरों को रुपए देते हैं। इसके बाद फिर दोनों पक्ष चले जाते हैं।