उड़ेगी पतंग, धरती पर होगी खेलों की उमंग

9 वर्ष पहले
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उदयपुर. आकाश और धरती पर सोमवार को उमंगों के रंग बिखरे रहेंगे। मौका होगा मकर संक्रांति का, जब शहरवासी दड़ी मार, सितौलिया, गिल्ली डंडा जैसे पारंपरिक खेल तो खेलेंगे ही, पतंगबाजी का मजा भी लेंगे। क्योंकि जयपुर, अहमदाबाद और दूसरे शहरों से यहां बसे लोगों, उनकी परंपरा को भी संगत देनी है। भगवान सूर्य नारायण की पूजा और दान कर पुण्य अर्जन के इस पर्व की तैयारियां घरों में भी हुई हैं।
गुलाबबाग में गूंजा सितौलिया
शैलेंद्र प्रताप सिंह भाटी . उदयपुर त्न अंग्रेजी का कथन है, ‘लर्निग व्हाइल प्लेइंग’ यानी ‘खेल-खेल में सीखें’। मकर संक्रांति सितौलिया खेलने का दिन है। इस लिहाज से यह दिन सितौलिया खेलते-खेलते जिंदगी के प्रबंधन को समझने भी का है। आइए जानें सितौलिया और जीवन के मैनेजमेंट में क्या है एक जैसा?
मैनेजमेंट में पढ़ाया जाने लगा खेल
जीवन में मौके बड़ी मुश्किल से मिलते है। वैसे ही सितौलिया फोड़ने के सिर्फ तीन मौके ही मिलते हैं। कई बार काबिलियत होते हुए भी हमें कई बार जीत नहीं मिलती। सितौलिया के सीमित मौके हमें बड़ी आसानी से समझा देते हैं कि सिर्फ मौके मिल जाने का मतलब जीत मिलना नहीं होता। जरूरी है कि मौका मिलने पर हमारा निशाना अचूक हो। बस लक्ष्य पर नजरें जमाएं और निशाना दाग दें, जीत तय है।
चाहे सितौलिया बनाने वाली टीम हो या उसे आउट करने की कोशिश करते प्रतिद्वंद्वी। जीत तभी मिलती है, जब खिलाड़ियों का तालमेल बढ़िया हो। ‘साथ दें और साथ लें’ वाली टीम-भावना के बिना न सितौलिया में जीता जा सकता है, न ही जीवन में कहीं और। टीम ऊर्जावान हो। खिलाड़ी टीम के लिए खेलें, न कि खुद के लिए। क्योंकि खुद के लिए खेलने वाला खिलाड़ी पूरी टीम को नुकसान पहुंचा सकता है।