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डाउनलोड करेंउदयपुर. फतहसागर तट पर स्थित महाकालेश्वर मंदिर के पाश्र्व भाग में भगवान पद्मनाभ (विष्णु) की शेषनाग पर शयन अवस्था में विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी। अष्टधातु की इस प्रतिमा का अलौकिक नजारा नेहरू गार्डन, राजीव गांधी उद्यान, संजय गार्डन तथा रानी रोड से हो सकेगा।
सार्वजनिक प्रन्यास श्रीमहाकालेश्वर के योजनाकारों ने मंदिर विस्तार के प्लान में झील किनारे भगवान पद्मनाभ की प्रतिमा स्थापना के प्लान को मूर्त रूप देने का निर्णय कर लिया है। सवा सौ फीट लंबी (शयनावस्था) में बनने वाली प्रतिमा की मोटाई 10 फीट के करीब होगी।
भगवान पद्मनाभ के सिरहाने की तरफ शेष नाग के विशाल फन होंगे। प्रतिमा का निचला आधार (सीमेंट कंक्रीट से निर्मित फाउंडेशन) काफी मजबूत होगा। पद्मनाभ प्रतिमा के दर्शन मंदिर के भीतर व बाहर से किए जा सकेंगे। सार्वजनिक प्रन्यास ट्रस्ट के सचिव एडवोकेट चंद्रशेखर दाधीच ने बताया कि मंदिर के पाश्र्व (जहां लक्षचंडी यज्ञ का आयोजन हुआ था) के पास प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। इस शिव रात्रि के पश्चात प्रतिमा निर्माण शुरू हो जाएगा। एक वर्ष में प्रतिमा स्थापित करने का लक्ष्य है।
महाकाल मंदिर के चारों तरफ शिवरात्रि से पहले बनेगा निर्मल जल कुंड बनेगा
महाकालेश्वर मंदिर के चारों तरफ अष्ट दल कमल के आकार का जल कुंड बनाया जाएगा। यह निर्माण अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर होगा। स्थान की कमी के कारण जलकुंड की चौड़ाई दस फीट के करीब होगी। जल कुंड में फतहसागर के निर्मल जल का प्रवाह अनवरत होगा। पानी रिसाइकिल भी होगा। जल कुंड में पानी डालने व निकालने की मशीनरी लगाई जाएगी। जलकुंड पार करके मंदिर में जाने के लिए छोटी पुलियाएं बनाई जाएंगी। मंदिर के पीछे स्थित महाकाल घाट का जीर्णोद्धार भी शीघ्र प्रारंभ होगा।
महाकालेश्वर मंदिर के चारों तरफ अष्ट दल कमल के आकार का जल कुंड बनाया जाएगा। यह निर्माण अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर होगा। स्थान की कमी के कारण जलकुंड की चौड़ाई दस फीट के करीब होगी। जल कुंड में फतहसागर के निर्मल जल का प्रवाह अनवरत होगा। पानी रिसाइकिल भी होगा। जल कुंड में पानी डालने व निकालने की मशीनरी लगाई जाएगी। जलकुंड पार करके मंदिर में जाने के लिए छोटी पुलियाएं बनाई जाएंगी। मंदिर के पीछे स्थित महाकाल घाट का जीर्णोद्धार भी शीघ्र प्रारंभ होगा।
समाधियां परकोटे में संरक्षित
मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय रुद्राक्ष भवन के बाहर हनुमान मंदिर के सामने परिसर के बीच स्थित सैकड़ों वर्ष पुरानी समाधियों को गोलाकार चारदीवारी बना कर संरक्षित किया गया है। समाधि परिसर में स्थित विशाल वट वृक्ष के नीचे भगवान महामृत्युंजय की प्रतिमा इस शिवरात्रि से पूर्व स्थापित की जाएगी। समाधि स्थल के दोनों तरफ फव्वारे निर्माण की योजना है। समाधि स्थल के सामने गौशाला का निर्माण पूर्ण हो चुका है। पचास गायों के रहने की व्यवस्था की गई है। गायों के लिए चारा की व्यवस्था दानदाताओं एवं मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से होगी।
मंदिर परिसर में होगा वन वे ट्रैफिक
महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन का प्रवेश अंबा माता मेन रोड से होगा। दर्शन के पश्चात वाहन वापस उसी मार्ग से बाहर नहीं निकलेंगे। मंदिर ट्रस्ट कार्यालय रुद्राक्ष भवन के पास से आईजी बंगले की तरफ सड़क बनाई जा रही है। मंदिर परिसर से बाहर जाने वाले वाहन नए मार्ग से बाहर निकलेंगे।
पुस्तकालय की स्थापना शीघ्र
प्रन्यास के सचिव दाधीच ने बताया कि गीता प्रेस गोरखपुर व अन्य प्रमुख छापाखानों से प्रकाशित होने वाली धार्मिक पुस्तकों का संकलन किया जा चुका है। रुद्राक्ष भवन में इन पुस्तकों को क्रमवार रख कर शीघ्र की पुस्तकालय प्रारंभ कर दिया जाएगा।
भगवान पद्मनाभ की 125 फीट लंबी शयनाकार प्रतिमा स्थापना का आइडिया महाकाल मंदिर के ट्रस्टियों ने नाथद्वारा में नाथूवास की पहाड़ी पर स्थापित होने वाली शिव प्रतिमा से लिया है। मिराज उद्योग समूह ने विशाल शिव प्रतिमा की स्थापना की घोषणा की थी।
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