उदयपुर. बड़ी तालाब के चारों ओर बनने वाली रिंग रोड का सर्वे एक सप्ताह से रुका हुआ है। कारण करीब 70 फीसदी काम पूरा कर चुकी कंसल्टेंट कंपनी की टीम पैंथरों से डर गई है। कंसल्टेंट ने यूआईटी को लिखा है कि इस इलाके में पैंथर हैं। इसलिए बाकी का सर्वे करवाना है तो वन विभाग के स्टाफ को साथ रखने की व्यवस्था करें ताकि टीम की सिक्योरिटी रहे।
बड़ी तालाब की रिंग रोड का काम यूआईटी की देखरेख में हो रहा है। इसके तहत पिछले दिनों ही यूआईटी ने सर्वे के लिए कंसल्टेंट को वर्क ऑर्डर जारी किया था। इसके साथ ही कंसल्टेंट की टीम ने 20 दिन पहले टाेटल स्टेशन मशीन के साथ बड़ी तालाब के आसपास टोपोग्राफी सर्वे का काम भी शुरू कर दिया। काम दो माह में पूरा होना था।
करीब 70 फीसदी काम होने के बाद सप्ताह भर पहले सर्वे टीम को बड़ी तालाब की पाल के सामने पहाड़ी की तलहटी में दो पैंथर नजर आ गए। इससे सहमे सर्वेयर काम छोड़ लौट आए। तब से सर्वे वापस शुरू ही नहीं हो सका है। सर्वेयर्स को पैंथर के हमले की आशंका है। बड़ी तालाब से सटे वन क्षेत्र की स्थिति और ग्रामीणों से पैंथर के आने की जानकारी लेने के बाद अब कंसल्टेंट महेंद्र शर्मा ने यूआईटी काे लिखित में जानकारी दी है। उन्होंने पत्र में बताया है कि सर्वे के दौरान पैंथर नजर आए हैं। ऐसे में सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।
सज्जनगढ़ अभयारण्य क्षेत्र से आते हैं पैंथर
बड़ी तालाब के आसपास का इलाका सज्जनगढ़ वन अभयारण्य क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है, जहां पैंथरों का निवास है। अभयारण्य में पानी की व्यवस्था है, फिर भी कई बार पैंथर बड़ी तालाब और इससे सटे वन क्षेत्र में आ जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार पैंथरों को विचरण करते देखा भी है।
2 किमी रोड पहले से, साढे तीन किमी का हाेना है सर्वे
अधिकारियों के मुताबिक बड़ी तालाब की रिंग रोड करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबी होगी। इसमें से करीब दो किलोमीटर एरिया (पाल के आसपास, बड़ी वरड़ा मार्ग व बड़ी सज्जनगढ़ मार्ग) में सड़क बनी हुई है। बाकी साढ़े तीन किलोमीटर रोड के लिए बड़ी तालाब के पश्चिमी छोर पर सर्व होना है। इस काम पर करीब दो लाख रुपए खर्च होंगे।
कटारिया के निर्देश-छह माह में बनाओ पीछोला रिंग रोड
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने यूआईटी को पीछोला की रिंग रोड का काम छह माह में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अफसरों ने यहां सड़क सीमा में आ रही निजी जमीन को आपसी सहमति से लेने की कवायद तेज कर दी है। भूमि अवाप्ति अधिकारी लालसिंह देवड़ा ने दो दिन पूर्व अधिकारियों केे साथ मौका देखा।
इस दौरान खातेदारों से बातचीत कर उन्हें सहमति से जमीन देने के लिए तैयार करने का प्रयास भी किया गया। गौरतलब है कि यूआईटी ने इस जमीन को अवाप्ति में ले रखा है, लेकिन प्रयास किए जा रहे हैं कि जमीन सहमति से मिल जाए और समय रहते रिंग का काम पूरा हो जाए।