उदयपुर. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाया है। कटारिया ने कहा है कि प्राइवेट स्कूल में कम सैलेरीी के बावजूद टीचर रिजल्ट अच्छा दे रहे है, दूसरी तरफ सरकारी टीचर अच्छी सैलेरीी मिलने के बावजूद रिजल्ट अच्छा नहीं दे पा रहे हैं। कटारिया के पुतले जलाने वालों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि पुतले जल रहे हैं उसकी वे चिंता नहीं करते।
कटारिया ने यह बात रविवार को शहर के मल्लातलाई क्षेत्र में अंबेडकर खेल मैदान में प्रतिभावन सम्मान समारोह में कहीं। कटारिया ने कहा कि जब भी मौका मिला हमने टीचर की तनख्वाह बढ़ाने में कोई कमी नहीं रखी। हमारे सरकारी कॉलेज, स्कूलों में टीचर काे जितनी तनख्वाह मिल रही है इतनी शायद ही किसी आैर राज्य में होगी, मगर सरकारी स्कूलों का पूरे प्रदेश के रिजल्ट का विश्लेषण निकाला जाए तो मात्र 35 प्रतिशत रिजल्ट रहता है। परीक्षा में यदि कूल रिजल्ट 76 प्रतिशत रहता है तो यह प्राइवेट स्कूलों के रिजल्ट के मिलने से रहता है। पीड़ा इसी बात की है कि कम सैलेरीी में पढ़ाता वो रिजल्ट अच्छा दे रहा है और जो अच्छी सैलेरी ले रहा वह रिजल्ट अच्छा नहीं दे पा रहा। कटारिया ने कहा सरकारी स्कूलों में थोड़ा बहुत रिजल्ट अच्छा रह रहा है वह भी लड़कियों के कारण है।
इस रिजल्ट को बाहर निकाल दे तो सारे टीचर मेरे पर नाराज हो जाएंगे। पिछले दिनों मैंने थोड़ा बहुत कह दिया तो जगह जगह मेरे पुतले जलाए जा रहे हैं, मगर मैं इसकी चिंता नहीं करता। इस अवसर पर 2013,14 की बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले सरकारी स्कूलों के 78 प्रतिभावान छात्र, छात्राओं को सम्मान किया गया। इससे पहले कटारिया ने यहां भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण भी किया। साथ ही सरकारी स्कूल रेजीडेंसी के लिए निगम की ओ से खरीदी गई बस की चाबी भी स्कूल प्रशासन को सौंपी। इस अवसर पर पूर्व मंत्री मदन दिलावर,मेयर रजनी डांग व ग्रामीण विधायक फुल सिंह मीणा भी मौजूद थे।
शिक्षा संकुल के बाहर शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
राजस्थान शिक्षक शिक्षाधिकारी संघर्ष समिति की ओर से एकीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया गया। शिक्षा संकुल के बाहर हुए इस प्रदर्शन में शिक्षामंत्री, पंचायतीराज मंत्री व एसीएस का पुतला दहन हुआ। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद थे। समिति के सदस्य प्रकाश मिश्रा ने कहा कि 15 से 28 सितंबर तक एकीकरण के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
खफा शिक्षाविदों ने शिक्षामंत्री को जमकर सुनाई खरी-खरी
एजुकेशन सिस्टम में ब्यूरोक्रेसी द्वारा समस्त नीतिगत निर्णय लिए जाने से खफा शिक्षाविदों ने शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ के समक्ष जमकर नाराजगी जताकर खुद का विरोध दर्ज कराया।साथ ही मांग रखी कि हायर एजुकेशन के तंत्र को स्वतंत्र और स्वायत्त बनाकर संवैधानिक पहचान दिलाई जाए। मौका था, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में राजस्थान यूनिवर्सिटी में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के समापन कार्यक्रम का। शिक्षामंत्री ने कहा कि प्रदेश में निजी कॉलेज और विश्वविद्यालय मनमानी रोकने के लिए शीघ्र ही नियामक आयोग का गठित होगा। शिक्षाविदों का सलाहकार बोर्ड बनेगा।
सरकारी कॉलेजों में 1018 पदों पर व्याख्याताओं की भर्ती जल्द की जाएगी। मंत्री की इस घोषणा के बाद महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ विमल प्रसाद अग्रवाल ने शिक्षामंत्री से शिकायत की कि उनके रहते हुए विभागीय अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव जैसे अधिकारी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय ले रहे हैं। सभी अधिकारी अनियंत्रित हो रहे हैं। अगर सलाहकार बोर्ड में नौकरशाही का हस्तक्षेप रहा तो कोई शिक्षाविद इसमें शामिल नहीं होगा।
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