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डाउनलोड करेंउदयपुर. शहर में गली-मोहल्लों, कॉलोनियों का सही नामकरण नहीं होने से घर आने वाले मेहमानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा या निवेश से संबंधित डाक, आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा ऑनलाइन खरीदा गया सामान मंजिल तक नहीं पहुंच पाता है। शहर में कई लोगों ने अपने हिसाब से ही गली-मोहल्लों का नाम रख दिया है।
ऐसे भी उदाहरण सामने आए हैं, जहां एक ही मोहल्ले व चौराहे के दो-दो नाम हैं। कुछ क्षेत्रों के नाम पुलिस, प्रशासनिक, डाक व नगर निगम के रिकॉर्ड में अलग अलग हैं। शहर का विस्तार हो चुका है, कई जगह कॉलोनियों व कॉम्पलेक्स का निर्माण हो चुका है, जिनके बारे में शहर के लोगों को भी जानकारी नहीं है। विपक्ष के पार्षद मोहम्मद अयूब ने बताया कि इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है। अगली बैठक में इसको चर्चा में शामिल करवाएंगे।
अब तक क्या हुआ
निगम ने एक दशक पहले सभी वार्डों में हर गली मोहल्ले के बोर्ड लगवाए थे। जो हट गए और कई जगह उन पर पोस्टर चस्पा कर दिए। पार्षदों के नाम बदले गए। कुछ जगह लोगों ने निजी स्तर पर ही नाम चस्पा करवा दिए।
जाना होता है रवींद्र नगर पहुंच जाते हैं अरविंद नगर
सुंदरवास क्षेत्र में रवींद्र नगर कॉलोनी का कहीं भी बोर्ड नहीं लगा है। ऐसे में यहां आने वाले मेहमान अरविंद नगर जा पहुंचते हैं। क्षेत्रवासी रामनारायण विजयवर्गीय ने बताया कि रवींद्र नगर आने वालों का रास्ता भटकना तय है। बोहरागणेशजी क्षेत्र में भी इस तरह की समस्या है।
अंजुमन चौक या मुखर्जी चौक
शहर के बीच स्थित मुखर्जी चौक को कई लोग अंजुमन चौक के नाम से जानते हैं। यहां नगर निगम की ओर से बोर्ड अंजुमन चौक का लगा हुआ है जबकि दुकानों पर मुखर्जी चौक लिखा हुआ है। ऐसी ही स्थिति अन्य क्षेत्रों की भी है।
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