पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Work Of Two Highways Start Udaipur Rajasthan

दो हाइवे का काम शुरू, तीन प्रोजेक्ट अब भी कागजों में

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

उदयपुर. संभाग के पांच रोड को हाईवे में तब्दील करने की योजना में सिर्फ दो का निर्माण कार्य होता दिखाई देने लगा है। पांच मार्गों के विकास की मंजूरी एक साल पहले मिली थी, जिनमें से तीन की कार्यवाही कागजों से आगे नहीं चल पाई है।

उदयपुर से गोमती और राजसमंद से भीलवाड़ा मार्गों को फोरलेन बनाने जबकि उदयपुर से झाड़ोल, सोम होकर ईडर, भटेवर से चारभुजा और स्वरूपगंज से रतलाम तक 10 मीटर चौड़े मेगा हाईवे की मंजूरी एक साल पूर्व केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने दी थी। तत्कालीन भूतल एवं सड़क परिवहन मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी ने संभाग में रोड नेटवर्क की कमी देखते हुए पांच मार्गों के विस्तार की स्वीकृति दी थी। मध्यप्रदेश और गुजरात को जोडऩे वाले दो इंटर स्टेट रोड्स को भी महत्व नहीं दिया गया।

संभाग से शुरू होकर गुजरात के ईडर तथा मध्यप्रदेश के रतलाम को मेगा हाईवे से जोडऩे से उदयपुर संभाग के आदिवासी क्षेत्रों का विकास होगा। केंद्र सरकार ने संभाग के पिछड़े जनजाति क्षेत्रों का विकास करने की योजना के अंतर्गत इन क्षेत्रों से हाईवे निकालने की योजना बनाई थी।

एनओसी की प्रक्रिया जटिल है
एक वर्ष पूर्व स्वीकृत पांच हाईवे में से तीन का काम काफी धीमा होने की वजह यह है कि भूमि अवाप्ति तथा वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। हमारा विभाग सभी कामों को तत्परता से पूरा कर रहा है। एक बार निर्माण शुरू होने के बाद काम की गति अपने आप तेज हो जाएगी।
एच.के.भट्ट, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नेशनल हाईवे उदयपुर

एक साल पहले मिली थी पांच हाइवे को मंजूरी
भटेवर-चारभुजा मार्ग
जिले के भटेवर कस्बे से राजसमंद जिले के चारभुजा कस्बे तक 160 किमी लंबा मेगा हाईवे निर्माण की स्वीकृति एक वर्ष पूर्व दी गई थी। उदयपुर से भटेवर फोरलेन रोड से कनेक्ट है। नई स्वीकृति के तहत भटेवर से वल्लभनगर, मावली, नाथद्वारा, हल्दीघाटी, लोसिंग, केलवाड़ा होकर चारभुजा तक मेगा हाईवे बनाना प्रस्तावित है। एक वर्ष में सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने का काम हुआ है। डीपीआर बनने के बाद निर्माण राशि की मंजूरी, भूमि अवाप्त करने की अधिसूचना का प्रकाशन, भूमि अवाप्ति की कार्रवाई, मुआवजा वितरण, निविदा जारी करना, कार्यादेश तथा निर्माण कार्य शुरू करना आदि तमाम महत्वपूर्ण काम बाकी हैं।

उदयपुर-ईडर मार्ग
उदयपुर से गुजरात के ईडर को जोडऩे वाले मार्ग के निर्माण में एक वर्ष में सिर्फ प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की गई है। जंगल व पहाड़ों के बीच से रोड निकाले जाने के कारण वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए नेशनल हाईवे परियोजना निदेशक से एनओसी मांगी गई है। एक सौ55 किमी लंबा यह मेगा हाईवे उदयपुर से झाड़ोल, सोम, गरणवास होकर ईडर तक बनाया जाएगा। यह मार्ग बनने पर उदयपुर-अहमदाबाद फोरलेन के अलावा दूसरा मार्ग होगा। इस मार्ग के बनने पर नया खेड़ा, पई, उंदरी, झाड़ोल तथा सोम के पिछड़े आदिवासी गांवों का विकास होगा।


स्वरूपगंज-रतलाम रोड
सिरोही जिले के स्वरूपगंज कस्बे से उदयपुर जिले के कोटड़ा, सोम तथा खेरवाड़ा होकर डूंगरपुर, बांसवाड़ा होते हुए रतलाम तक प्रस्तावित 225 किमी मेगा हाईवे के निर्माण को भी एक वर्ष में खास महत्व नहीं दिया गया है। एक वर्ष बीत जाने पर इस मार्ग के सिर्फ सर्वे के टेंडर हुए हैं। सर्वे के बाद डीपीआर बनाना, निर्माण राशि की स्वीकृति, वन विभाग से पर्यावरण स्वीकृति, मार्ग में कोई वन्य जीव अभयारण्य पड़ता हो तो सुप्रीम कोर्ट की इंपावरमेंट कमेटी की स्वीकृति, भूमि अवाप्ति, टेंडर अवार्ड तथा कार्यादेश की औपचारिकताओं में लंबा समय लग सकता है।


दोनों ओर से बन रही है ट्विन टनल
उदयपुर से गोमती 83 किमी रोड को फोरलेन बनाने का काम गति पकड़ चुका है। इस परियोजना के प्रमुख काम चीरवा घाटे में सिक्स लेन ट्विन टनल का काम पहाड़ के दोनों तरफ से शुरू हो चुका है। भूत गिरी बावजी के देवरे की तरफ से टनल का आउट कटिंग काय 90 फीसदी पूरा हो गया है। इसके बाद पहाड़ की खुदाई शुरू हो जाएगी। अंबेरी वाले छोर से टनल आउट कट कार्य 25 फीसदी हुआ है। कैलाशपुरी व देलवाड़ा बाइपास कार्य शुरू हो गया है। नाथद्वारा में 1200 मीटर लंबा एलिवेटेड रोड का निर्माण तेज गति से चल रहा है। खारी व बनास नदियों पर रोड ब्रिज बनाने के काम तेजी से चल रहे हैं।

राजसमंद से भीलवाड़ा के बीच 85 किमी लंबे निर्माणाधीन फोरलेन रोड की रफ्तार गोमती रोड की तुलना में काफी तेज है। इसका निर्माण समतल जमीन पर होने से काम की गति अपेक्षा से अधिक है। इस परियोजना में पोटलां के पास चंद्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल, कुंवारिया रेलवे समपार पर ओवर ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। पोटलां, कारोही, पुर और कुंवारिया गांवों के बाहर से बाइपास निकालने हैं। इस फोरलेन का निर्माण अप्रैल 2016 तक पूरा होने की संभावना है। इस पर 700 करोड़ रुपए खर्च होंगे। उदयपुर से राजसमंद गोमती फोरलेन रोड से जुड़ेगा। राजसमंद से भीलवाड़ा के बीच इस मार्ग के बनने पर उदयपुर से भीलवाड़ा के बीच आवागमन के दो फोरलेन मार्ग हो जाएंगे।