उदयपुर। भौगोलिक नजरिये से अलग मेवाड़ के खेतों में भी हरियाणा के जौ, सरसों और गेहूं की उन्नत किस्में न केवल लहलहा रही हैं, बल्कि दोगुना उत्पादन भी दे रही हैं। ये कृषि विभाग या गैर सरकारी संस्थानों की बदौलत नहीं बल्कि एक रिटायर्ड प्रोफेसर के जुनून से संभव हो पाया है। हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे (ईंटाली) फतहनगर निवासी मूलचंद मूंदड़ा बीते 40 साल से हरियाणा की उन्नत फसलों के बीज मेवाड़ के किसानों को उपलब्ध करा रहे हैं। एक किसान से दूसरे किसान तक फैलते हुए हरियाणा का बीज अब करीब 25-30 हजार बीघा खेतों में बोया जाने लगा है।
2003 में रिटायरमेंट के बाद तो उन्होंने इसे अभियान का रूप दे दिया। प्रो. मूंदड़ा बताते हैं कि उनके पिताजी व्यापारी थे। बचपन में पिताजी से अक्सर सुना करते थे कि ‘मंडी में हरियाणा- पंजाब का माल आया है।’ ये बात उनके जेहन में हमेशा बनी रही। उन्होंने उदयपुर यूनिवर्सिटी (वर्तमान में एमपीयूएटी) से बीएससी की। यहां एमएससी होने के बावजूद वे 1967 में एमएससी करने हरियाणा यूनिवर्सिटी गए। पढ़ाई पूरी होते ही 1969 में वहीं जॉब करने लगे। चार-पांच साल वहां की फसल-बीज आदि को समझने पर 1974 से बीज भेजना शुरू किया।
ये किस्में दी किसानों को
प्रो. मूंदड़ा सरसों के आरएच-30 और लक्ष्मी बीज लाए, उसके 10 साल बाद राजस्थान सरकार ने सार्वजनिक रूप से ये बीज उपलब्ध करवाए। कम पानी और खाद में उगने वाली गेहूं की डब्ल्यूएच 147, जौ की बीएच-393, डीडब्ल्यूआर-यूबी-52, सरसों की आरएच-119, आरएच-0406, आरएच-0749, कपास की एचडी 123, एचडी 432 आदि किस्में उपलब्ध करवाई।
अब इन किस्माें पर प्रयोग
प्रो. मूंदड़ा ने अब गेहूं की नई किस्में डीएचडब्ल्यू-17, पीबीडब्ल्यू 550, एचडी-2967 किसानों को दी है। हरियाणा के अलावा राजकीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी फार्म अजमेर से मसाला वर्गीय फसलों के बीज भी दिए हैं। इसमें जीरा, अजवाइन, धनिया, कसूरी मैथी, सौंफ, कलौंजी आदि है।
किसान बोले-इन बीजों से बंपर उत्पादन, बढ़ी आय
'मैंने दो-तीन साल से इस बीज का उपयोग कर रहा हूं। गेहूं उत्पादन डेढ़ गुना और जौ करीब दुगुना हो गया है। इस साल मूंगफली का बीज भी लिया, उसकी उपज भी अच्छी है।' मोहन लाल मेनारिया, रोहेड़ा (मावली)
'मैंने हरियाणा वैरायटी का जौ लिया था। आम जौ से ऊंचा है, आसानी से गिरता नहीं। पैदावार डेढ़-दो गुनी है। आसपास के कई किसान मुझसे बीज ले गए।' छोगालाल मेनारिया, चोकड़ी (फतहनगर)
'मैं चार साल से हरियाणवी जौ की बुवाई कर रहा हूं। 40 प्रतिशत अधिक पैदावार हुई। आम जौ से दुगुना उत्पादन हुआ। बाजार भाव भी अच्छा मिला।' मुकेश जाट, आजोलिया का खेड़ा (चित्तौड़गढ़)
'मैंने हरियाणा का काठिया और देशी गेहूं लिया। गेहूं उत्पादन डेढ़ गुना हो गया। देशी कपास की बुवाई भी की, जिसमें एक पौधे पर करीब डेढ़ सौ फूल लगे।' श्याम लाल मंडोवरा, पलानाखुर्द (मावली)
'मैंने सरसाें का बीज लिया। बंपर पैदावार होने की संभावना है। सरसों का दाना भी देशी फसल से बड़ा है, जिसकी बाजार में डिमांड है।' बंशीलाल, ढूंढ़िया (कपासन)