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90's के इंडियन क्रिकेट के 10 मैजिकल मोमेंट, जिसे फैन्स कभी नहीं भूल पाएंगे

90 के दशक में सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली, मोहम्मद अजहरुद्दीन, कुंबले जैसे दिग्गज इंडियन क्रिकेट टीम में थे।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 08, 2018, 06:58 PM IST

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    स्पोर्ट्स डेस्क.90s के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के पास सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली, अजहरुद्दीन और राहुल द्रविड़ जैसे स्टार क्रिकेटर्स से। इसे सचिन तेंडुलकर के करियर का भी गोल्डन दौर कहा जाता है। उस वक्त सचिन अपनी बैटिंग से पूरी दुनिया में छा गए थे। उनके करियर के कुछ बेस्ट मोमेंट्स की बात करें तो, 24 अप्रैल को 25वें बर्थडे पर लगाई गई सेन्चुरी शायद ही कोई क्रिकेट फैन भूला हो। ऑस्ट्रेलिया को किया था पस्त...

    1998: शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन की 2 सेन्चुरी
    - सचिन तेंडुलकर ने करियर में 100 इंटरनेशनल सेन्चुरी लगाईं, लेकिन 1998 में अपने 25वें बर्थडे पर लगाई गई सेन्चुरी शायद उनके लिए सबसे खास होगी। फैन्स भी सचिन की इस सेन्चुरी को आज भी याद करते हैं।

    - टीम इंडिया शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल रही थी। कोका कोला कप ट्रायंगुलर सीरीज में तीसरी टीम न्यूजीलैंड थी। ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंच चुकी थी। आखिरी लीग मैच में भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया ही थी। मैच में पहले बैटिंग करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 284 रन बनाए थे। जवाब में एक वक्त भारत के 4 विकेट 138 रन पर ही गिर गए थे।

    - फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को कम से कम 254 रन बनाने थे। तब मैच के बीच में आई आंधी के बाद ये स्कोर 46 ओवर में 237 रन कर दिया गया था। सचिन क्रीज पर डटे रहे। उन्होंने 143 रन की इनिंग खेली। आउट होने से पहले वो टीम के स्कोर को 242 रन पर पहुंचा चुके थे। मैच में भले ही ऑस्ट्रेलिया ने 26 रन से जीत दर्ज की लेकिन भारत फाइनल में पहुंच चुका था।

    - दो दिन बार फाइनल मुकाबला सचिन के बर्थडे (24 अप्रैल) के दिन था। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग की और 50 ओवर में 272 रन बनाए। जवाब में सचिन ने 134 रन की जबरदस्त इनिंग खेल टीम इंडिया को जीत दिला दी। सचिन 45वें ओवर में आउट हुए थे।

    आगे की स्लाइड्स में जानें इंडियन क्रिकेट के ऐसे ही और यादगार मोमेंट्स के बारे में....

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    1997: जब PAK के खिलाफ गांगुली ने अकेले ही जिताया सहारा कप

    - 1997 में भारत-पाकिस्तान के बीच कनाडा में सहारा कप खेला गया था। 5 मैचों की इस सीरीज को भारत ने 4-1 से जीता था। लेकिन भारत vs पाकिस्तान से ज्यादा ये गांगुली vs पाकिस्तान सीरीज रही।

    - पूरी सीरीज में गांगुली जबरदस्त फॉर्म में रहे। ऑलराउंड परफॉर्मेंस देते हुए उन्होंने 4 लगातार मैचों में मैन ऑफ द मैच के अवॉर्ड जीते, जो आजतक रिकॉर्ड है।

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    1999: पाकिस्तान के खिलाफ कुंबले के 10 विकेट
    - अनिल कुंबले की इस रिकॉर्ड बॉलिंग को हर क्रिकेट फैन आज भी याद करता है। पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली में हुए टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने 212 रन सेजीत दर्ज की थी।

    - चौथी इनिंग में पाकिस्तान 420 रन के टारगेट का पीछा कर रही थी। उनके ओपनर सईद अनवर और शाहिद आफरीदी के बीच 101 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप हुई।

    - 25वें ओवर में टीम इंडिया को पहली सफलता मिली। कुंबले ने आफरीदी को 41 रन के निजी स्कोर पर आउट किया। इसके बाद तो जैसे पाकिस्तनी टीम बिखर गई और 207 रन के स्कोर पर पूरी टीम ऑलआउट हो गई।

    - मैच में कुंबले ने दूसरी इनिंग के सभी 10 विकेट लिए थे। उन्होंने जिम लेकर के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की थी।

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    पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड कप क्वार्टर-फाइनल
    - भारत-पाकिस्तान के बीच मैच हमेशा ही रोमांचक रहा है, लेकिन वर्ल्ड कप का ये मुकाबला शायद ही कोई क्रिकेट फैन भूला हो। मैच को जीतकर टीम इंडिया फाइनल में पहुंची थी, लेकिन फील्ड पर दो अहम घटनाएं भी हुई थीं।

    - एक वक्त 42 ओवर में टीम इंडिया ने 200 रन बनाए थे। लग रहा था स्कोर बड़ा नहीं बन पाएगा। तब अजय जडेजा बैटिंग के लिए आए और उन्होंने 25 बॉल में 45 रन बना डाले थे। वकार यूनिस के एक ओवर में उन्होंने 22 रन बटोरे थे। इसके बाद भारत ने 287 रन का स्कोर बनाया था।

    - दूसरा इंसीडेंट पाकिस्तानी बैट्समैन आमिर सोहेल और इंडियन बॉलर वेंकटेश प्रसाद के बीच हुआ था। जब सेट हो चुके आमिर ने चौका लगाते हुए प्रसाद की ओर इशारा किया था। अगली ही बॉल पर प्रसाद ने सोहेल को 55 रन के निजी स्कोर पर बोल्ड कप पवेलियन लौटने का इशारा किया था।

    - टीम इंडिाय ने मैच में 39 रन से जीत दर्ज की थी। 93 रन बनाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू मैन ऑफ द मैच बने थे।

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    1998: पाकिस्तान के खिलाफ इंडिपेंडेंस कप का 3rd फाइनल
    - बांग्लादेश में ये ट्रायंगुलर सीरीज हुई थी, जिसमें भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें थीं। सीरीज में तीन फाइनल होने थे। भारत ने

    पहला फाइनल 8 विकेट से जीता। सचिन ने 95 रन बनाए। जबकि, दूसरे फाइनल में पाकिस्तान ने वापसी की।

    - अब तीसरा फाइनल डिसाइडर बन गया था। पहले बैटिंग करते हुए पाकिस्तान ने पिच का पूरा फायदा उठाया और 314 रन बना डाले। सचिन ने तेज शुरुआत करते हुए सिर्फ 26 बॉल पर 41 रन बना डाले। उन्होंने गांगुली के साथ सिर्फ 8.3 ओवर में 71 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की।

    - सचिन के आउट होने के बाद गांगुली ने रॉबिन सिंह के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 179 रन की पार्टनरशिप की और टीम को टारगेट के काफी करीब पहुंचा दिया। हालांकि, रॉबिन सिंह के आउट होने के बाद भारत के कुछ विकेट (अजहर, अजय जडेजा, सिद्धू) जल्दी गिर गए।

    - मैच के आखिरी ओवर में भारत को जीत के लिए 9 रन चाहिए थे और क्रीज पर ऋषिकेश कनितकर और जवागल श्रीनाथ थे। दोनों ने संभलकर बैटिंग की और भारत को आखिरी 2 बॉल पर 3 रन की दरकार थी। कनितकर ने सकलेन मुश्ताक की के इस ओवर की 5वीं बॉल पर चौका लगाकर भारत को मैच जिता दिया था।

    - ये मैच कनितकर के विजयी चौके के लिए आज भी याद किया जाता है। सचिन (41) के अलावा गांगुली ने 124 रन और रॉबिन सिंह ने 82 रन की इनिंग खेली थी।

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    1996: घायल अजहर की 74 बॉल में टेस्ट सेन्चुरी
    - साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता में इस टेस्ट में टीम इंडिया 329 रन से हार गई थी, लेकिन ये मैच अजहरुद्दीन की संघर्षभरी 109 रन की इनिंग के लिए याद किया जाता है। तब सचिन तेंडुलकर टीम के कप्तान थे।

    - अफ्रीका ने पहली इनिंग में 428 रन बनाए। जवाब में एक वक्त टीम इंडिया 161 रन पर 7 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी। इससे पहले अजहर 6 रन के निजी स्कोर पर ब्रायन मैक्मिलन की बाउंसर पर घायल होकर पवेलियन लौट गए थे।

    - टीम की खराब हालत देख अजहर क्रीज पर लौटे और तेजी से रन बनाए। 74 बॉल पर उन्होंने अपनी सेन्चुरी पूरी कर ली। अजहर मैच में 77 बॉल पर 109 रन बनाकर आउट हुए थे। 161 से उन्होंने टीम का स्कोर 322 रन पर पहुंचा दिया था।

    - मैच की दूसरी इनिंग में भी अजहर ने सबसे ज्यादा 52 रन बनाए थे, लेकिन वो टीम की हार को नहीं टाल सके। चौथी इनिंग में 467 रन के टारगेट का पीछा करते हुए भारतीय टीम 137 रन पर ऑलआउट हो गई थी।

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    1996: चेन्नास्वामी स्टेडियम में श्रीनाथ-कुंबले शो
    - 1996 में टाइटन कप हुआ था। ये ट्रायुंगलर सीरीज थी, जिसमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका की टीमें थीं। ग्रुप स्टेज में दोनों को हराकर साउथ अफ्रीका फाइनल में पहुंच गई थी। अब भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच फाइनल की लड़ाई थी।

    - तब कप्तान रहे मार्क टेलर के 105 रन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 215 रन का स्कोर बनाया। सचिन तेंडुलकर ने मैच में अकेले संघर्ष किया, जबकि दूसरे छोर पर विकेट गिरते रहे। सचिन 88 रन बनाकर आउट हुए। तब भारत का स्कोर 8 विकेट पर 164 रन था और उसे जीत के लिए 52 रन की और जरूरत थी।

    - तब लोकल ब्वॉय जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले ने बैटिंग में कमाल करते हुए 52 रन की पार्टनरशिप कर टीम को न सिर्फ मैच जितवाया बल्कि फाइनल में भी पहुंचा दिया था। भारत ने साउथ अफ्रीका को हराकर टाइटन पर जीता था।

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    1993: हीरो कप के भारत के आखिरी 2 मैच
    - 5 देशों के बीच ये सीरीज भारत में खेली गई थी, जिसे भारतीय टीम ने जीता था। इसमें बाकी टीमें वेस्ट इंडीज, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका और जिम्बॉब्वे थीं। जिम्बॉब्वे को छोड़ा बाकी 4 टीमें सेमीफाइनल में पहुंची थीं।

    - सेमीफाइनल में भारत के सामने साउथ अफ्रीका थी। ये मैच बेहद रोमांचक रहा था। पहले बैटिंग करते हुए टीम इंडिया सिर्फ 195 रन बनाई पाई। जवाब में कुंबले-जडेजा की दमदार बॉलिंग के सामने अफ्रीकी बैट्समैन भी पस्त हो गए।

    - एक वक्त 145 रन पर ही उनके 7 विकेट गिर गए थे। अंत में डेव रिचर्डसन और ब्रायन मैक्मिलन ने अफ्रीकी टीम को टारगेट के काफी करीब पहुंचा दिया। टीम को आखिरी ओवर में जीत के लिए सिर्फ 6 रन चाहिए थे।

    - तब कप्तान रहे अजहरुद्दीन ने यंग सचिन तेंडुलकर को आखिरी ओवर के लिए बॉल थमाकर सभी को चौंका दिया था। पूरे स्टेडियम में सन्नाटा था। सचिन ने चतुराई से बॉलिंग कर आखिरी ओवर में सिर्फ 3 रन खर्च किए और इसके साथ ही भारतीय टीम 2 रन से मैच जीतकर फाइनल में पहुंच गई थी।

    - अब फाइनल में उसका मुकाबला वेस्ट इंडीज से था। टीम इंडिया ने मैच में 225 रन बनाए। लारा अच्छी लय में दिख रहे थे। यहां एक बार फिर सचिन तेंडुलकर ने बॉल से कमाल दिखाते हुए लारा का विकेट लिया और भारत की मैच में वापसी करवाई।

    - इसी मैच में अनिल कुंबल ने अपने वनडे करियर की बेस्ट बॉलिंग करते हुए सिर्फ 12 रन देकर 6 विकेट झटके थे। वेस्ट इंडीज की टीम 123 रन पर ऑलआउट हो गई थी। 102 रन से मैच जीतकर भारत हीरो कप का विनर बना था।

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    1996: टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ गांगुली की लगातार सेन्चुरी
    - ये वो साल था जब गांगुली ने टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था। उन्होंने पहला दौरा इंग्लैंड का किया और एक के बाद एक 2 सेन्चुरी लगाकर टेस्ट में जबरदस्त एंट्री की थी।

    - पहले टेस्ट में टीम इंडिया को 8 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। इसमें गांगुली शामिल नहीं थे। दूसरे टेस्ट में उन्हें मौका मिला। ये गांगुली का डेब्यू टेस्ट था,जिसमें उन्होंने 131 रन की इनिंग खेली। टीम इंडिया ये मैच ड्रॉ करवाने में सफल रही थी।

    - तीसरा मैच भी ड्रॉ रहा था। इसमें गांगुली ने 136 और 48 रन की इनिंग खेली थी। गांगुली इसमें मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज भी रहे थे।

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    1992: इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में 3-0 से जीत
    - उस दौर में इसे टेस्ट क्रिकेट में भारत की सबसे बेहतरीन सीरीज कहा जाता है। ग्राहम गूच, स्टीवर्टर और हिक जैसे दिग्गजों से भरी टीम के

    खिलाफ भारत ने 3-0 से जीत दर्ज की थी। ये वो दौर था जब अनिल कुंबले टेस्ट में अपना करियर शुरू कर रहे थे।

    - इस सीरीज में कुंबले, वेंकटपति राजू और राजेश चौहान की तिकड़ी के सामने इंग्लिश बैट्समैन टिक नहीं सके थे। तीनों ने सीरीज में मिलकर कुल 46 विकेट झटके थे। इसमें कुंबले ने 21, राजू ने 16 और चौहान ने 9 विकेट लिए थे।

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Web Title: 10 Most Memorable Moments Of Indian Cricket From 90s
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