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विकेट से भी कम थी हाइट तब शुरू किया था खेलना, आज हैं टीम इंडिया का कप्तान

15 साल की उम्र में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में पृथ्वी ने 546 रन बनाए थे। इसमें 85 चौके, 5 छक्के शामिल थे।

Danik Bhaskar | Jan 14, 2018, 01:33 PM IST

स्पोर्ट्स डेस्क. न्यूजीलैंड में चल रहे अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप के पहले मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया की U-19 टीम को 100 रन से हरा दिया। भारत की जीत के हीरो टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ रहे, जिन्होंने मैच में शानदार बैटिंग करते हुए 94 रन की इनिंग खेली। अपनी इनिंग में उन्होंने 8 चौके और 2 सिक्स लगाते हुए 94 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। पृथ्वी भारत के उभरते हुए स्टार बैट्समैन हैं, जिन्हें लोग रन मशीन कहने के साथ ही उनकी तुलना सचिन से भी करते हैं। इसलिए कहा जाता है सचिन...

- पृथ्वी जब 4 साल के थे तब ही मां का निधन हो गया था। वे 3 साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहे हैं।
- 15 साल की उम्र में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में पृथ्वी ने 546 रन बनाए थे। इसमें 85 चौके, 5 छक्के शामिल थे। इसी से पूरे देश में चर्चा में आए।
- सचिन भी इसी टूर्नामेंट में कांबली के साथ 664 रन की सबसे बड़ी साझेदारी कर चर्चा में आए थे।
- पृथ्वी ने पिछले साल अपने दिलीप ट्रॉफी के डेब्यू मैच में शानदार 154 रन बनाए थे। इसी के साथ पृथ्वी सचिन के बाद दूसरे क्रिकेटर बने जिन्होंने दिलीप ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी दोनों के डेब्यू मैच में शतक लगाया था।

ऐसा रहा पृथ्वी का बचपन

- पृथ्वी शॉ का बचपन मुंबई में गुजरा। उन्होंने यहां के आजाद मैदान में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। वे तब से क्रिकेट खेल रहे हैं जब उनकी लंबाई क्रिकेट के स्टम्प्स से भी कम थी। अब उन्हें क्रिकेट के जानकार रन मशीन कहते हैं।
- मुंबई के आजाद मैदान में एक वक्त में 15-20 मैच खेले जाते हैं। लेकिन इसके बाद भी जब पृथ्वी बैटिंग करते हैं तो दूसरी टीमों के खिलाड़ियों के साथ उनके माता-पिता और कोच का भी ध्यान पृथ्वी की ही बैटिंग में लगा रहता है। लोग उन्हें चियर करने दूर-दूर से आते हैं।

ऐसा रहा IND-AUS U-19 मैच का रोमांच

- मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवरों में 7 विकेट पर 328 रन बनाए थे। जिसमें कप्तान पृथ्वी शॉ ने सबसे ज्यादा 94, मंजोत काला ने 86, शुबमान गिल ने 63 रन की इनिंग खेली।
- जवाब में 329 रन के टारगेट का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई अंडर-19 टीम 42.5 ओवरों में 228 रन पर सिमट गई। कंगारू टीम की ओर से ओपनर जैक एडवर्ड्स ने सबसे ज्यादा 73 रन बनाए। 5 बैट्समैन तो डबल डिजिट में भी रन नहीं बना सके।
- भारत की ओर से शिवम मावी और कमलेश नागरकोटी ने शानदार बॉलिंग करते हुए 3-3 विकेट झटके। इसके अलावा अभिषेक शर्मा और अनुकूल रॉय को 1-1 विकेट मिला।

आगे की स्लाइड्स में जानें पृ्थ्वी की लाइफ से जुड़े अन्य फैक्ट्स और देखें फोटोज...

कोच भी देखकर रह गए थे दंग

 

- पृथ्वी शॉ मुंबई के सबसे लोकप्रिय युवा क्रिकेटर्स में से हैं। करीब 10 साल से पृथ्वी को कोचिंग दे रहे राजू पाठक बताते हैं कि जब उन्होंने पहली बार पृथ्वी को ट्रायल के लिए रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल में बुलाया तो उन्हें यकीन नहीं हुआ कि एक छोटे बच्चे में इतना टैलेंट हो सकता है।
- वे बताते हैं कि हम बच्चों की उम्र के हिसाब से करीब 10 अलग-अलग नेट लगाते हैं। इसी में बच्चे अपनी उम्र के बच्चों के साथ प्रैक्टिस करते हैं।
- कोच के मुताबिक 'हमने पहली बार जब पृथ्वी का ट्रायल लिया तो वो करीब 7-8 साल का था। कहने लगा कि मुझे 12 साल के बच्चों के साथ प्रैक्टिस कराइए। हमने उसे मना किया और उसकी उम्र के बच्चों के साथ प्रैक्टिस शुरू कराई लेकिन 8-10 बॉल के बाद ही हमने उसे बड़े बच्चों के नेट में शिफ्ट कर दिया।'
- पृथ्वी जब तीन साल के थे तब ही उनके पिता पंकज शॉ ने उनका दाखिला संतोष पिंगुलकर की क्रिकेट एकेडमी में करा दिया था। अभी वे रिजवी स्प्रिंगफील्ड स्कूल में 12वीं में हैं।
- सचिन तेंडुलकर का बेटा अर्जुन तेंडुलकर पृथ्वी का अच्छा दोस्त है और खुद मास्टर ब्लास्टर पृथ्वी की बैटिंग पसंद करते हैं। 

पिता ने निभाई मां की भी जिम्मेदारी

 

- इस क्रिकेटर की लाइफ बेहद स्ट्रगल वाली रही है। उनके पिता का कपड़ों का बहुत छोटा-सा बिजनेस था। जब पृथ्वी केवल 4 साल के थे तभी उनकी मां का देहांत हो गया था।
- पृथ्वी ने जब एकेडमी में एडमिशन लिया था तब उन्हें रोज सुबह 4 बजे उठकर विरार से बांद्रा जाना पड़ता था। उन्हें इतनी छोटी उम्र में करीब साढ़े तीन घंटे ट्रैवल करना पड़ता था। 
- सुबह उन्हें तैयार करने से लेकर नाश्ता बनाने का काम तक उनके पिता पंकज ही करते थे। बाद में उन्हें अपना बिजनेस बंद करके एकेडमी के पास शिफ्ट करना पड़ा। 

- बचपन से ही पृथ्वी को आलू की भजिया बेहद पसंद है और जब कोई खिलाड़ी उनसे भजिया मांगता था तो वे उसे मना कर देते थे। यहां तक कि वो अपने कोच से भी भजिया शेयर करने में हिचकिचाते थे।
- पृथ्वी चाइनीज फूड के दीवाने हैं और अपनी हर अच्छी बैटिंग के बाद वे कोच से सूप आदि की डिमांड करते थे।
 

हेलमेट पर बॉल लगने पर भी थे lbw होने के चांस

 

- पृथ्वी के साथ खेलने वाले क्रिकेटर अंचल मिश्रा बताते हैं कि पृथ्वी अब तक 6 अलग-अलग टीमों की कप्तानी कर चुके हैं, लेकिन खासियत यह है कि टीम का कोई भी खिलाड़ी उनकी कप्तानी में दबाव में नहीं रहता है। उनके तकनीक बेहद शानदार है।
- राजू बताते हैं कि एक पूर्व क्रिकेटर इकबाल सिद्दीकी ने पृथ्वी को नेट पर प्रैक्टिस करते हुए देखा था। उन्होंने उस समय पृथ्वी से कहा था कि तुम्हारी लंबाई जब विकेट जितनी ही है, तो तुम स्टम्प की बॉल क्यों मारते हो।
- वे बताते हैं कि उस समय पृथ्वी इतना छोटा हुआ करता था कि यदि उसकी हेलमेट पर भी बॉल लग जाए तो उसके lbw होने के चांस होते थे। उनके लिए बैट का साइज छोटा किया जाता था।

क्रिकेट को लेकर हैं बड़े क्रेजी

 

 

- क्रिकेट को लेकर शॉ के क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2011 में जब फेमस टूर्नामेंट हैरिस शील्ड में रिजवी स्प्रिंगफील्ड का मैच अंजुमन इस्लाम की टीम से था। तब पृथ्वी की टीम के ज्यादातर प्लेयर्स ट्रायल देने गए थे।
- उस वक्त टीम को अच्छे प्लेयर्स की जरूरत थी, पृथ्वी उस समय बुखार में थे। लेकिन जब कोच ने उन्हें यह बात बताई तो वो दवा खाकर ग्राउंड पर खेलने पहुंचे। उन्होंने इस मैच में शानदार 166 रन बनाए थे।
- राजू बताते हैं कि जहां बड़े-बड़े खिलाड़ियों को कोई एक शॉट या गलती सुधारने में 100 बॉल खेलना पड़ता है, वहीं पृथ्वी 10 से 20 बॉल में अपनी गलती ठीक कर लेते हैं। उनके अंदर यह नैचुरल टैलेंट है। पृथ्वी अब तक 9 फर्स्ट क्लास मैचों में 56.52 के एवरेज से 961 रन बना चुके हैं