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जबरदस्त फॉर्म में चल रहे विराट, मैदान के बाहर निभा रहे ज्यादा अहम भूमिका

dainikbhaskar.com | Last Modified - Dec 03, 2017, 10:24 AM IST

विराट कोहली श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में शानदार फॉर्म में हैं। उनके बल्ले से रनों की बरसात हो रही है।
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अयाज मेमन की कलम से...

विराट कोहली इस सीरीज में शानदार फॉर्म में हैं। उनके बल्ले से रनों की बरसात हो रही है। उन्होंने लगातार तीन इनिंग में तीन सेन्चुरी लगाई है। तीसरे टेस्ट में भारतीय कप्तान जैसे ही क्रीज पर सेट हुए श्रीलंकाई बॉलर्स को भी अंदाजा हो गया होगा कि आगे क्या होने वाला है। यह सही है कि कोटला विराट कोहली का होम ग्राउंड है और श्रीलंकाई बॉलिंग बिना दांत वाले शेर की तरह है। इसके बावजूद जिस तरह की लय विराट ने दिखाई है वो किसी भी बैट्समैन के लिए काबिले तारीफ है।

विराट इस साल इंटरनेशनल क्रिकेट में 11 सेन्चुरी लगा चुके हैं। उनके करियर में जिस तरह का निखार आ रहा है, अंदाजा लगाना मुश्किल है कि रिटायरमेंट तक कौन सा रिकॉर्ड उनकी पहुंच से दूर होगा। मेरा मानना है कि वे मैदान पर ही नहीं, बल्कि इसके बाहर भी सार्वजनिक मुद्दे उठाकर भारतीय क्रिकेट के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं। खिलाड़ियों की थकान और सैलरी के बारे में उन्होंने चिंता जाहिर की। इसके बाद सीओए प्रमुख विनोद राय ने उनसे मुलाकात की। इसके अलावा विराट ने पिछले सप्ताह एक कॉनक्लेव में युवा क्रिकेटरों से टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान देने को भी कहा। कोहली ने जैसा आइकोनिक स्टेटस हासिल किया है उसमें लिमिटेड ओवर के क्रिकेट का बड़ा योगदान है। इसके बावजूद जिस तरह उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को सपोर्ट किया है, भारत में अभी उसकी बहुत जरूरत है। उनकी यह सलाह न सिर्फ उभरते खिलाड़ियों के लिए बल्कि टीम इंडिया में मौजूद उनके साथियों के लिए भी जरूरी है।

राष्ट्रीय टीम की नजर से देखा जाए तो खिलाड़ियों का वर्कलोड और सैलरी का मुद्दा अहम है। आमतौर पर ऐसे मामले उठाए जाने पर खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच तनाव बढ़ जाता है। इससे विराट की पोजिशन और भी इंपोर्टेंट हो जाती है। उन्होंने डोमेस्टिक सीजन की शुरुआत में और श्रीलंका के खिलाफ तीसरे टेस्ट से पहले भी थकान का मुद्दा उठाया था। इसके बाद उन्हें वनडे सीरीज से आराम मिला (मुझे लगता है कि टी20 सीरीज से भी मिलेगा)। हालांकि इसपर कुछ भौहें भी तनी। कुछ पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि विराट जिस तरह के फॉर्म में हैं, आराम लेकर वे गलती कर रहे हैं। उनका तर्क है कि विराट को इस फॉर्म का पूरा फायदा उठाना चाहिए। लेकिन, मुझे लगता है कि इस वजह से विराट का स्टैंड और अर्थपूर्ण हो जाता है।

विराट के खेल के प्रति उत्साह, रनों की भूख और जीत की महत्वाकांक्षा में बिल्कुल कमी नहीं आई है। वे अपने खेल के टॉप पर हैं। इसके बावजूद अगर उन्हें बर्न आउट का खतरा महसूस हो रहा है तो उनकी चिंता पर जरूर ध्यान देना चाहिए। कुछ लोगों ने थकान के मुद्दे और बीसीसीआई से सैलरी बढ़ाने की मांग को एक-दूसरे से जोड़ कर देखने की कोशिश की है। लेकिन, ये दोनों मुद्दे बिल्कुल अलग हैं। पैसे का पहलू रेवेन्यू शेयरिंग के फॉर्मूले से जुड़ा हुआ है। यह तोलमोल का मामला है। दोनों मामले पर विराट का स्पष्ट रुख बीसीसीआई के लिए सीधा संदेश है। खिलाड़ी खुद को भारतीय क्रिकेट का एक्टिव साझेदार मानते हैं न कि पैसिव। विराट अब महज खिलाड़ी नहीं और कप्तान के तौर पर ऐसा रुख रखना सिर्फ पद की वजह से संभव नहीं है। व्यक्तित्व ताकतवर हो तभी यह संभव है। साथ ही अपने, टीम, देश और खेल को लेकर स्पष्ट विजन होना भी जरूरी है। हर मायने में वे अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं।

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Web Title: jbrDast form mein chl rahe virat, maidaan ke baahar nibhaa rahe jyada ahm bhumika
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