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FACTS: जिस योद्धा के नाम पर है रायपुर का स्टेडियम, उसे मिली थी सरेआम मौत

7 वर्ष पहले
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(रायपुर स्टेडियम की ताजा तस्वीर। बीच में है वह स्टाम्प जो वीर नारायण सिंह के नाम पर जारी हुआ था।)
खेल डेस्क. चैम्पियंस लीग टी-20 का छठा सीजन आज से शुरू हो रहा। टूर्नामेंट के अहम मुकाबले रायपुर के शहीद वीर नारायण इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जाएंगे। यह महज दूसरा मौका है जब रायपुर इंटरनेशनल लेवल के मुकाबलों की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2010 में छत्तीसगढ़ की टीम कनाडा के खिलाफ टकराई थी।

छत्तीसगढ़ के इस स्टेडियम का नाम भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित है। जिस महान योद्धा के नाम पर इस स्टेडियम का नामकरण हुआ है, उस वीर ने छत्तीसगढ़ वासियों को न सिर्फ अंग्रेजों के जुल्मों से बचाने का प्रयास किया, बल्कि 1857 में हुई क्रांति की नींव भी डाली। उन्हें ब्रिटिश सरकार ने सरेआम तोप से उड़ाकर मौत की सजा दी थी।

कौन थे शहीद वीर नारायण सिंह?

वीर नारायण सिंह का जन्म छत्तीसगढ़ के सोनखाना गांव में सन् 1795 में हुआ। 1856 में जब छत्तीसगढ़ प्रांत भीषण सूखे की गिरफ्त में था और अंग्रेजों द्वारा लागू किए कानून के कारण प्रांतवासी भुखमरी का शिकार हो रहे थे, तब वीर नारायण ने उनके लिए क्रांतिकारी कदम उठाए। उन्होंने साहुकारों से 'बरही' के रूप में अनाज उधार लेकर अपने लोगों में बांट दिए। उनके इस कदम पर ब्रिटिश सरकार को बहुत गुस्सा आया। 24 अक्टूबर 1856 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें संबलपुर में गिरफ्तार कर रायपुर की जेल में बंद कर दिया।

कुछ सैनिक व अपने समर्थकों की मदद से वे अगस्त 1857 में जेल से भाग गए और अपने गांव सोनाखाना पहुंचे।

अंग्रेजों को नित बढ़ते अत्याचारों से तंग आकर वीर नारायण ने बगावत करने की ठान ली। उन्होंने कुछ समर्थकों को साथ लेकर ब्रिटिश आर्मी से मुठभेड़ की। वीर नारायण की अगुवाई में उठी बगावत की आग से अंग्रेज सरकार बौखलाई हुई थी। उसने जनता पर अत्याचार बढ़ा दिए। ब्रिटिश सरकार की बढ़ती ज्यादतियां देखते हुए और अपने लोगों को बचाने के लिए वीर नारायण ने समर्पण करने की ठान ली।

उन्होंने ब्रिटिश सरकार के आगे समर्पण किया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। 10 दिसंबर 1857 को ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सरेआम तोप से उड़ाकर मौत की सजा दी। वीर नारायण को बर्बरता से सजा दिए जाने पर जनता भड़क गई और वहीं से स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई।

पोस्टल स्टाम्प नारायण सिंह के नाम

शहीद वीर नारायण सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी 130वीं बरसी पर सरकार ने 60 पैसे का स्टाम्प जारी किया, जिसमें नारायण को तोप के आगे बंधा दिखाया गया।
2008 में बना स्टेडियम

रायपुर क्रिकेट संघ ने इस स्टेडियम का निर्माण 2008 में करवाया। जब नामकरण की बात आई तो सबसे पहले वीर नारायण सिंह का नाम आगे आया।

यह स्टेडियम देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टेडियम है। इसमें एक बार में 65,000 दर्शक मैच का लुत्फ ले सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री ने दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के मालिक जीएमआर ग्रुप को इस स्टेडियम में खेलने का आमंत्रण भेजा था। 2013 के आईपीएल सीजन में रायपुर दिल्ली डेयरडेविल्स टीम का दूसरा होम ग्राउंड रहा।

शुरू हुआ सेल्फी का दौर

रायपुर में चैम्पियंस लीग टी-20 के मैच खेलने पहुंचीं टीमों ने यहां आते ही सेल्फी खींचने का दौर शुरू किया। टूर्नामेंट के ऑफिशियल ट्विटरफेसबुक अकाउंट पर ये तस्वीरें पोस्ट की गईं।

आगे क्लिक कर देखिए, चैम्पियंस लीग टी-20 टूर्नामेंट खेलने पहुंचे खिलाड़ियों की सेल्फी...